95 साल की दादी की कांवड़ यात्रा बनी मिसाल, 24 पोतों ने पालकी में बैठाकर कराया सफर

HIGHLIGHTS
- बुलंदशहर की रहने वाली सोनदेवी ने पूरी की हरिद्वार यात्रा की इच्छा।
- ‘महाकाल ग्रुप’ के नाम से 24 पोते दादी को लेकर निकले कांवड़ यात्रा पर।
- यात्रा के दौरान पोते बारी-बारी से संभाल रहे हैं पालकी का जिम्मा।
मेरठ। सावन की कांवड़ यात्रा में जहां डीजे, आकर्षक कांवड़ और शिवभक्तों का उत्साह लोगों का ध्यान खींच रहा है, वहीं सिवाया टोल प्लाजा पर सोमवार को एक भावुक कर देने वाला दृश्य देखने को मिला।
95 वर्षीय सोनदेवी पालकी में बैठकर हाथ जोड़ते हुए भोलेनाथ का जयघोष कर रही थीं, जबकि उनके 24 पोते बारी-बारी से पालकी को अपने कंधों पर उठाकर आगे बढ़ रहे थे। इस दृश्य को देखकर वहां मौजूद लोगों की नजरें ठहर गईं। जिसने भी परिवार का यह समर्पण देखा, उसने इसे भावनात्मक और प्रेरणादायक पल बताया।
दादी की इच्छा को पोतों ने बनाया संकल्प
बुलंदशहर के हसनपुर जागीर निवासी सोनदेवी की लंबे समय से इच्छा थी कि वह हरिद्वार जाकर मां गंगा में स्नान करें और कांवड़ यात्रा में शामिल हों। लेकिन उम्र अधिक होने के कारण उनके लिए यह यात्रा करना आसान नहीं था।
ऐसे में परिवार के युवाओं ने उनकी इच्छा को पूरा करने का संकल्प लिया। ‘महाकाल ग्रुप’ के नाम से यात्रा कर रहे सोनदेवी के 24 पोते उन्हें हरिद्वार लेकर गए और गंगास्नान कराया। इसके बाद अब वे उन्हें पालकी में बैठाकर गांव वापस लेकर जा रहे हैं।
पोतों का कहना है कि योगी सरकार की ओर से कांवड़ यात्रा को लेकर किए गए इंतजामों के कारण श्रद्धालुओं को किसी तरह की परेशानी नहीं हो रही है।
दूरी तय करते ही बदल लेते हैं कंधे
महाकाल ग्रुप के सदस्यों ने बताया कि यात्रा में शामिल सभी 24 युवक सोनदेवी के पोते हैं। पालकी को उठाने की जिम्मेदारी कोई एक व्यक्ति लगातार नहीं निभाता है। कुछ दूरी चलने के बाद दूसरे पोते पालकी का कंधा संभाल लेते हैं, जिससे दादी को यात्रा में किसी परेशानी का सामना न करना पड़े।
परिवार का कहना है कि सोनदेवी की खुशी उनके लिए सबसे बड़ा आशीर्वाद है।
सिवाया टोल प्लाजा पर उमड़ी भीड़
जब कांवड़ यात्रा सिवाया टोल प्लाजा पहुंची तो पालकी में बैठी सोनदेवी को देखने के लिए लोगों की भीड़ जुट गई। कई लोग उनके पैर छूकर आशीर्वाद लेने पहुंचे, जबकि कुछ लोगों ने इस भावुक पल को अपने मोबाइल कैमरे में कैद किया।
सोनदेवी पूरे रास्ते हाथ जोड़कर ‘बोल बम’ और ‘हर-हर महादेव’ का जयघोष करती रहीं। वहीं उनके पोते पूरी श्रद्धा और उत्साह के साथ उनकी सेवा में लगे रहे।
आस्था के साथ संस्कारों का संदेश
कांवड़ यात्रा का यह दृश्य केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह परिवार के संस्कारों और बुजुर्गों के सम्मान का उदाहरण भी बन गया।
जहां युवा कांवड़िए भगवान शिव के प्रति अपनी श्रद्धा प्रकट कर रहे हैं, वहीं सोनदेवी के 24 पोतों ने बुजुर्गों की सेवा और सम्मान का संदेश दिया। कांवड़ मार्ग पर यह अनोखा कारवां लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बनने के साथ प्रेरणा का माध्यम भी बना हुआ है।
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