अभिषेक बनर्जी के घर पर हमले का आरोप; दिलीप घोष बोले- उन्हें मारने का समय किसके पास?

HIGHLIGHTS
- कोलकाता के कालीघाट स्थित अभिषेक बनर्जी के आवास के आसपास दो महीने के लिए निषेधाज्ञा लागू।
- भाजपा और तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं के बीच शुक्रवार देर रात हिंसक झड़प हुई।
- पुलिस ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 के तहत आदेश जारी किया।
पश्चिम बंगाल के दक्षिण कोलकाता स्थित कालीघाट इलाके में तृणमूल कांग्रेस के सांसद अभिषेक बनर्जी के आवास के आसपास कोलकाता पुलिस ने शनिवार सुबह से निषेधाज्ञा लागू कर दी है। शुक्रवार देर रात भाजपा और तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं के बीच हुई हिंसक झड़प के बाद पुलिस ने यह फैसला लिया। इलाके में शांति और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए यह कदम उठाया गया है।
पुलिस ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 की धारा 163 के तहत आदेश जारी किया है। इसके अनुसार, अभिषेक बनर्जी के आवास के आसपास तय किए गए क्षेत्र में निर्धारित संख्या से अधिक लोगों के एकत्र होने पर पाबंदी रहेगी। कोलकाता पुलिस के एक अधिकारी ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि यह निषेधाज्ञा दो महीने तक प्रभावी रहेगी।
अभिषेक के आवास पर झड़प को लेकर ममता बनर्जी ने भाजपा पर साधा निशाना
अभिषेक बनर्जी पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे हैं। उनके आवास के बाहर हुई घटना पर ममता बनर्जी ने नाराजगी जताई और भाजपा के साथ-साथ बंगाल सरकार पर भी सवाल उठाए।
ममता बनर्जी ने कहा, ''रात को तीन बजे जब सब सो रहे होते हैं, तब भाजपा के लोग किसी के घर में घुस जाते हैं। उनको हमला करने का अधिकार किसने दिया। क्या देश में संविधान नहीं है?''
उन्होंने काली पूजा के पारंपरिक आयोजनों की अनुमति रद्द किए जाने का मुद्दा उठाते हुए कहा, "यहां पूरी तरह गुंडागर्दी हो रही है। लोग रात दो या तीन बजे यहां पहुंच जाते हैं। अगर आपमें बुलडोजर चलाने की हिम्मत है, तो रात तीन बजे गुंडों के समूह के साथ आकर काली पूजा में बाधा डालने की क्या जरूरत है? हम यहां पार्टी से जुड़ा काम कर रहे हैं और आप उसे रोकने के लिए आ रहे हैं।"
दिलीप घोष ने हमले के आरोपों को किया खारिज
पश्चिम बंगाल के मंत्री दिलीप घोष ने शनिवार को अभिषेक बनर्जी के आवास पर हमला किए जाने के आरोपों को खारिज किया। उन्होंने कहा कि अगर रात के समय वहां हंगामा किया जाएगा, तो कोई न कोई उसका जवाब जरूर देगा। इसके साथ ही उन्होंने सवाल उठाया कि अभिषेक बनर्जी को मारने के लिए आखिर किसके पास समय है।
अभिषेक बनर्जी के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए घोष ने कहा, "फुटपाथ पर किसी नेता का जन्मदिन मनाते पहली बार देखा है। अगर वे रात में वहां हंगामा करेंगे, तो कोई न कोई तो जवाब देगा ही। और अभिषेक बनर्जी को मारने के लिए किसके पास समय है। अब कुछ बचा नहीं है, इसलिए इस तरह की बात करके लोगों को भ्रमित करने का प्रयास कर रहे हैं।"
रात ढाई से साढ़े तीन बजे के बीच दोनों दलों के समर्थकों में भिड़ंत
अभिषेक बनर्जी ने दावा किया है कि उनके खिलाफ जानबूझकर कराई गई यह घटना पिछले छह महीनों में उनकी हत्या की सातवीं कोशिश थी। शनिवार को वह अपना 39वां जन्मदिन मना रहे थे। इससे पहले शुक्रवार आधी रात के बाद उनके कालीघाट स्थित आवास के बाहर तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ता और समर्थक जन्मदिन मनाने के लिए जुटे थे।
इसी दौरान रात करीब ढाई बजे से साढ़े तीन बजे के बीच भाजपा और तृणमूल कांग्रेस के समर्थकों के बीच कई बार टकराव हुआ। शुरुआत में दोनों पक्षों के बीच बहस हुई, लेकिन देखते ही देखते मामला धक्का-मुक्की और पथराव तक पहुंच गया।
अभिषेक बनर्जी ने आरोप लगाया कि उनकी हत्या करने की कोशिश की गई। उन्होंने भाजपा समर्थकों पर तृणमूल कांग्रेस के नजदीक स्थित पार्टी कार्यालय में तोड़फोड़ करने का भी आरोप लगाया।
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, इस हिंसक घटना में दोनों पक्षों के कई लोग घायल हुए हैं। सूचना मिलने के बाद बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी मौके पर पहुंचे। हालात को नियंत्रित करने और दोनों पक्षों के कार्यकर्ताओं को हटाने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज भी करना पड़ा।
पुलिस अधिकारियों से भी हुई अभिषेक बनर्जी की बहस
झड़प की घटना के विरोध में अभिषेक बनर्जी अपने आवास के सामने धरने पर बैठ गए। मौके पर मौजूद पुलिस अधिकारियों ने उनसे धरना समाप्त कर घर के अंदर जाने को कहा। पुलिस का तर्क था कि वहां धरना जारी रहने से इलाके में तनाव और बढ़ सकता है।
इस मुद्दे पर अभिषेक बनर्जी और पुलिस अधिकारियों के बीच बहस भी हुई। आखिरकार शनिवार सुबह करीब साढ़े छह बजे पुलिस के हस्तक्षेप के बाद वह अपने आवास के अंदर चले गए।
जन्मदिन के पोस्टर और बैनर फाड़ने का लगाया आरोप
तृणमूल कांग्रेस के समर्थकों के मुताबिक, शुक्रवार आधी रात के बाद वे अभिषेक बनर्जी का जन्मदिन मनाने के लिए उनके कालीघाट स्थित घर के बाहर एकत्र हुए थे। आरोप है कि रात करीब ढाई बजे भाजपा कार्यकर्ता अचानक वहां पहुंचे और 'चोर-चोर' के नारे लगाने लगे।
तृणमूल समर्थकों ने आरोप लगाया कि भाजपा कार्यकर्ताओं ने अभिषेक बनर्जी की तस्वीरों, कटआउट और जन्मदिन की शुभकामनाओं वाले बैनरों को फाड़ दिया। जब टीएमसी कार्यकर्ताओं ने उन्हें ऐसा करने से रोकने की कोशिश की, तो दोनों पक्षों के बीच कहासुनी शुरू हो गई। इसके बाद विवाद ने हिंसक रूप ले लिया।
इसी दौरान अभिषेक बनर्जी भी अपने आवास से बाहर आए और घायल समर्थकों से मुलाकात की। उन्होंने कहा, "मुझ पर हमला करने और मेरी हत्या करने की साजिश रची जा रही है।"
सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए भाजपा और पुलिस पर लगाए आरोप
घटना के बाद अभिषेक बनर्जी ने सोशल मीडिया पर पोस्ट साझा कर भाजपा और पुलिस को घेरा। उन्होंने अपने पोस्ट के साथ झड़प से जुड़ी एक तस्वीर और वीडियो भी साझा किया।
अभिषेक बनर्जी ने लिखा, "दो दिनों तक लगातार रेकी करने के बाद भाजपा के गुंडों ने आज रात दो बजे मेरे घर पर इस तरह हमला किया। फुटेज देखिए और खुद समझिए। अगर एक निर्वाचित सांसद के साथ ऐसा हो सकता है, तो कल्पना कीजिए कि पश्चिम बंगाल में आम आदमी की क्या हालत होगी।"
उन्होंने आगे कहा, "पिछले छह महीनों में यह मेरी हत्या की सातवीं कोशिश है। इसके बावजूद न तो पुलिस ने कोई कार्रवाई की और न ही न्यायपालिका ने हस्तक्षेप किया। पूरे राज्य में गुंडे खुलेआम उत्पात मचा रहे हैं, क्योंकि न्यायपालिका लगातार आंखें मूंदे हुए है। मूकदर्शक बने रहने के लिए धन्यवाद, माननीय न्यायाधीशों।"
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