904 करोड़ की बैंक धोखाधड़ी में किशोर बियानी पर CBI का शिकंजा, फ्यूचर रिटेल के ठिकानों पर छापेमारी

HIGHLIGHTS
- CBI ने 904.32 करोड़ रुपये की कथित बैंक धोखाधड़ी में FIR दर्ज की।
- किशोर बियानी, उनके भाई राकेश बियानी और फ्यूचर रिटेल लिमिटेड आरोपी बनाए गए।
- SBI की शिकायत पर धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश का मामला दर्ज हुआ।
सीबीआई ने 904.32 करोड़ रुपये की कथित बैंक धोखाधड़ी के मामले में फ्यूचर रिटेल लिमिटेड, कारोबारी किशोर बियानी और उनके भाई राकेश बियानी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। इस मामले में शुक्रवार को मुंबई में किशोर बियानी से जुड़े कई ठिकानों पर तलाशी अभियान भी चलाया गया। अधिकारियों ने इसकी जानकारी दी।
अधिकारियों के मुताबिक, मामले में अज्ञात सरकारी कर्मचारियों और अन्य लोगों को भी आरोपी बनाया गया है। दर्ज एफआईआर में धोखाधड़ी के लिए आपराधिक साजिश रचने और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत अपराध किए जाने के आरोप शामिल हैं।
CBI ने मामले को लेकर क्या जानकारी दी?
सीबीआई के प्रवक्ता ने बयान जारी कर बताया कि स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) की शिकायत के आधार पर किशोर बियानी और राकेश बियानी के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। इस केस में कुछ अज्ञात सरकारी कर्मचारियों और अन्य अज्ञात व्यक्तियों को भी शामिल किया गया है।
बैंक की शिकायत के अनुसार, आरोपियों पर आपराधिक साजिश के तहत धोखाधड़ी करने और प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) के तहत अपराध करने का आरोप है। इस कथित धोखाधड़ी के कारण शिकायतकर्ता बैंक को 904.32 करोड़ रुपये का नुकसान होने की बात कही गई है।
किशोर बियानी पर क्या हैं आरोप?
इस पूरे मामले पर कंपनी की ओर से फिलहाल कोई तत्काल प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। वहीं, सीबीआई का आरोप है कि एसबीआई की शिकायत में आरोपियों पर स्टेट बैंक ऑफ इंडिया और नौ बैंकों के कंसोर्टियम से क्रेडिट सुविधाएं यानी लोन प्राप्त करने के लिए आपराधिक साजिश रचने की बात कही गई है।
सीबीआई के बयान के मुताबिक, फ्यूचर रिटेल कई रिटेल फॉर्मेट के जरिए अपना कारोबार संचालित करती थी। इनमें बिग बाजार, फैशन बिग बाजार और फूडहॉल जैसे हाइपरमार्केट और सुपरमार्केट शामिल थे। कंपनी अपने स्टोर के माध्यम से एफएमसीजी और फैशन से जुड़े उत्पादों की जनरल ट्रेडिंग भी करती थी।
जांच एजेंसी का आरोप है कि कंपनी ने बैंकों से प्राप्त रकम का इस्तेमाल उन निर्धारित उद्देश्यों के लिए नहीं किया, जिनके लिए लोन मंजूर किया गया था।
कब दर्ज हुई FIR और कहां हुई छापेमारी?
सीबीआई के बयान में यह भी आरोप लगाया गया है कि कंपनी ने अपनी सहयोगी कंपनियों और उससे जुड़ी अन्य इकाइयों के माध्यम से बैंक से प्राप्त धनराशि को दूसरी जगह ट्रांसफर कर दिया। एजेंसी के अनुसार, इस कथित फंड डायवर्जन की वजह से बैंक को आर्थिक नुकसान हुआ।
इस मामले में सीबीआई ने 4 नवंबर को एफआईआर दर्ज की थी। इसके बाद एजेंसी ने मुंबई में कई स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया।
सीबीआई प्रवक्ता के अनुसार, छापेमारी के दौरान जांच से संबंधित कई महत्वपूर्ण दस्तावेज मिले, जिन्हें एजेंसी ने जब्त कर लिया है।
फिलहाल सीबीआई पूरे मामले की जांच कर रही है। एजेंसी का कहना है कि कथित साजिश में शामिल सभी लोगों की भूमिका का पता लगाया जा रहा है। इसमें सरकारी कर्मचारियों के साथ-साथ निजी व्यक्तियों की भूमिका भी जांच के दायरे में है। इसके अलावा, बैंकों से मिले लोन के पैसे का आखिरकार कहां और किस तरह इस्तेमाल किया गया, इसकी भी पड़ताल की जा रही है।
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