भारत को मिली एक और सफलता: सेमी-क्रायोजेनिक इंजन टेस्ट में सफल

HIGHLIGHTS
- भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने गगनयान मिशन की तैयारियों को लेकर अहम अपडेट साझा किया है।
- इसरो के चेयरमैन डॉ.
- नारायणन ने बताया कि भारत का पहला मानव अंतरिक्ष मिशन अत्याधुनिक तकनीक पर आधारित है और इसकी तैयारियां तेज गति से आगे बढ़ रही हैं।
- मानव मिशन से पहले तीन अनक्रूड उड़ानें इसरो प्रमुख ने कहा कि गगनयान मिशन के तहत मानव को अंतरिक्ष में भेजने से पहले तीन बिना चालक (अनक्रूड) मिशन किए जाएंगे।
- इनमें पहला अनक्रूड मिशन जल्द लॉन्च किया जाएगा, जिसकी तारीखों की घोषणा जल्द की जाएग…
नई दिल्ली। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने गगनयान मिशन की तैयारियों को लेकर अहम अपडेट साझा किया है। इसरो के चेयरमैन डॉ. वी. नारायणन ने बताया कि भारत का पहला मानव अंतरिक्ष मिशन अत्याधुनिक तकनीक पर आधारित है और इसकी तैयारियां तेज गति से आगे बढ़ रही हैं।
मानव मिशन से पहले तीन अनक्रूड उड़ानें
इसरो प्रमुख ने कहा कि गगनयान मिशन के तहत मानव को अंतरिक्ष में भेजने से पहले तीन बिना चालक (अनक्रूड) मिशन किए जाएंगे। इनमें पहला अनक्रूड मिशन जल्द लॉन्च किया जाएगा, जिसकी तारीखों की घोषणा जल्द की जाएगी। उन्होंने कहा कि किसी भी तरह का जोखिम न लेते हुए सभी सुरक्षा मानकों की कई स्तरों पर जांच की जा रही है।
लॉन्च व्हीकल की ह्यूमन रेटिंग पूरी
डॉ. नारायणन के अनुसार, गगनयान मिशन के लिए लॉन्च व्हीकल की ‘ह्यूमन रेटिंग’ और सभी जरूरी सुरक्षा प्रणालियों का विकास पूरा हो चुका है। अब अगला चरण इन तकनीकों के वास्तविक परीक्षण का है।
सेमी-क्रायोजेनिक इंजन बना बड़ी उपलब्धि
इसरो प्रमुख ने हाल ही में हुए सेमी-क्रायोजेनिक इंजन के पावर हेड टेस्ट को बड़ी सफलता बताया। उन्होंने कहा कि इस परीक्षण में लगभग 90 प्रतिशत थ्रस्ट क्षमता का सफल परीक्षण किया गया, जो भविष्य के पूर्ण इंजन परीक्षणों के लिए महत्वपूर्ण कदम है।
इसरो के मुताबिक, अब पूर्ण इंजन परीक्षण की तैयारियां चल रही हैं और उपग्रह से जुड़े कार्यक्रम भी अंतिम चरण में हैं, जिनकी घोषणा जल्द की जाएगी।
महेंद्रगिरि में हुआ सफल हॉट टेस्ट
इसरो द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी के अनुसार, 24 जून 2026 को तमिलनाडु के महेंद्रगिरि स्थित इसरो प्रोपल्शन कॉम्प्लेक्स में सेमी-क्रायोजेनिक इंजन के पावर हेड टेस्ट आर्टिकल का 175 टन थ्रस्ट स्तर पर सफल ‘हॉट टेस्ट’ किया गया।
यह इस परीक्षण श्रृंखला का आठवां चरण था, जिसका उद्देश्य इंजन के उच्च थ्रस्ट स्तर पर प्रदर्शन और स्थिरता की जांच करना था। इससे पहले 94 टन और 120 टन थ्रस्ट स्तर पर भी परीक्षण सफलतापूर्वक किए जा चुके हैं।
100% क्षमता परीक्षण की ओर बढ़ा इसरो
इसरो के वैज्ञानिकों के अनुसार, यह परीक्षण पूरी तरह सफल रहा है और अब 200 टन यानी 100 प्रतिशत क्षमता वाले इंजन परीक्षण की दिशा में तेजी से काम किया जा रहा है। यह उपलब्धि भारत के स्वदेशी सेमी-क्रायोजेनिक इंजन विकास और भविष्य के अंतरिक्ष अभियानों के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
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