अनुब्रत मंडल ने बदला राजनीतिक रुख, ममता खेमे से दूरी के बाद ऋतब्रत गुट में शामिल

HIGHLIGHTS
- तृणमूल कांग्रेस नेता अनुब्रत मंडल अब ममता बनर्जी खेमे से अलग होकर ऋतब्रत बनर्जी गुट के साथ नजर आ रहे हैं।
- पार्टी ने उन्हें बीरभूम जिला अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी, जिसे बंगाल की राजनीति में अहम बदलाव माना जा रहा है।
- अनुब्रत के रुख में बदलाव के पीछे राजनीतिक मतभेदों के साथ कानूनी और पारिवारिक परिस्थितियों को भी वजह माना जा रहा है।
कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है। तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और कभी मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के करीबी सहयोगियों में गिने जाने वाले अनुब्रत मंडल अब ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट के साथ दिखाई दे रहे हैं। पार्टी ने उन्हें बीरभूम जिले का अध्यक्ष नियुक्त किया है।
पार्टी सूत्रों के मुताबिक, विधानसभा के पूर्व उपाध्यक्ष आशीष बनर्जी ने अनुब्रत मंडल और ऋतब्रत बनर्जी के बीच राजनीतिक तालमेल बनाने में अहम भूमिका निभाई। इसी बीच शनिवार को ऋतब्रत खेमे की कार्यसमिति बैठक में तृणमूल कांग्रेस के पूर्व विधायक निर्मल घोष की मौजूदगी ने भी राजनीतिक हलकों का ध्यान खींचा।
अनुब्रत मंडल लंबे समय तक तृणमूल कांग्रेस के प्रभावशाली नेताओं में शामिल रहे हैं। उन्हें ममता बनर्जी का भरोसेमंद सहयोगी माना जाता था और विभिन्न राजनीतिक तथा कानूनी चुनौतियों के दौरान भी मुख्यमंत्री ने कई अवसरों पर उनके पक्ष में सार्वजनिक रूप से बयान दिए थे।
हालांकि, हाल के महीनों में उनके रुख में बदलाव देखने को मिला। विधानसभा चुनाव के बाद अनुब्रत ने संगठन की कुछ रणनीतियों और फैसलों पर खुलकर सवाल उठाए। उन्होंने यह भी संकेत दिए थे कि यदि उन्हें पार्टी में अपेक्षित सम्मान नहीं मिला तो वे अपने राजनीतिक विकल्पों पर विचार कर सकते हैं।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस बदलाव के पीछे केवल संगठनात्मक मतभेद ही नहीं, बल्कि व्यक्तिगत और कानूनी परिस्थितियां भी भूमिका निभा सकती हैं। गौरतलब है कि अनुब्रत मंडल और उनके परिवार का नाम पिछले कुछ वर्षों में कई जांचों और विवादों से जुड़ा रहा है। उनकी बेटी सुकन्या मंडल को भी कथित मवेशी तस्करी मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा गिरफ्तार किया गया था।
अनुब्रत मंडल के इस कदम को तृणमूल कांग्रेस के अंदर बदलते राजनीतिक समीकरणों के रूप में देखा जा रहा है, जिस पर आने वाले समय में पार्टी की प्रतिक्रिया और रणनीति महत्वपूर्ण होगी।
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