हवाई किराए पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, नियम न मानने वाली एयरलाइंस को ग्राउंडेड करने की चेतावनी
By Hitesh — August 17, 2026

HIGHLIGHTS
- केंद्र सरकार तीन सप्ताह में नए विमानन नियमों को अंतिम रूप देगी।
- कोर्ट ने नए नियमों को सात दिनों में प्रकाशित करने को कहा।
- यात्रियों के सामान की सीमा घटाने का मुद्दा भी सुनवाई में उठा।
Author: — Dainik Dehat
त्योहारों या आपात स्थिति के दौरान बढ़ते हवाई किराए से परेशान यात्रियों को जल्द राहत मिल सकती है। निजी एयरलाइनों की मनमानी को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि वह ‘भारतीय वायुयान अधिनियम, 2024’ के तहत नए नियमों को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया तेज कर चुकी है और तीन सप्ताह के भीतर इन्हें अंतिम रूप दे दिया जाएगा। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि अगर एयरलाइंस नए नियमों का पालन नहीं करती हैं तो उन्हें उड़ान भरने से रोका जा सकता है।
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को क्या कड़े निर्देश दिए?
जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ सामाजिक कार्यकर्ता एस. लक्ष्मीनारायणन की जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी। सरकार की ओर से सीलबंद लिफाफे में नए नियमों का मसौदा पेश किए जाने पर कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया और कहा, "आप इसे सात दिनों के भीतर प्रकाशित करें।"
पीठ ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि कोई एयरलाइन नियमों का उल्लंघन करती है तो उसकी उड़ानें रोक दी जाएं। हालांकि, केंद्र की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) अनिल कौशिक ने पीठ को बताया कि आखिरी दौर की चर्चाएं चल रही हैं और तीन सप्ताह के भीतर अंतिम नियम अधिसूचित कर दिए जाएंगे। मामले की अगली सुनवाई 7 सितंबर को होगी।
हवाई यात्रियों पर किस तरह बढ़ रहा है आर्थिक बोझ?
याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता रवींद्र श्रीवास्तव ने मौजूदा नियमों और उनके प्रभावी क्रियान्वयन पर सवाल उठाए। याचिका में निजी एयरलाइनों की ओर से अपनाए जा रहे कई कदमों का उल्लेख किया गया है।
- सामान के नियमों में कटौती: बिना किसी कारण के मुफ्त चेक-इन सामान की सीमा 25 किलोग्राम से घटाकर 15 किलोग्राम कर दी गई। पहले जो सुविधा टिकट का हिस्सा थी, उसे अब कमाई के एक नए जरिये में बदल दिया गया।
- सिंगल-पीस पॉलिसी: यात्रियों को केवल एक बैग चेक-इन करने की अनुमति दी जा रही है। चेक-इन बैग की सुविधा का इस्तेमाल नहीं करने पर भी टिकट की कीमत में कोई कमी नहीं की जाती।
- त्योहारों पर बढ़ता किराया: त्योहारों या खराब मौसम के दौरान हवाई किराए काफी बढ़ जाते हैं। इसका सबसे ज्यादा असर आखिरी समय में यात्रा करने वाले गरीब यात्रियों पर पड़ता है।
क्या सरकार हवाई किराए को नियंत्रित कर सकती है?
सुनवाई के दौरान दलील दी गई कि नागरिक उड्डयन मंत्री संसद में कह चुके हैं कि सरकार हवाई किराए की अधिकतम सीमा तय नहीं कर सकती। फिलहाल ऐसा कोई स्वतंत्र नियामक भी नहीं है, जिसके पास हवाई किराए या अन्य छिपे शुल्कों की समीक्षा करने अथवा उन्हें नियंत्रित करने की कानूनी शक्ति हो।
याचिका में कहा गया है कि इसी वजह से एयरलाइंस डायनेमिक प्राइसिंग एल्गोरिदम के जरिए यात्रियों का शोषण करती हैं। याचिका में यह भी दलील दी गई है कि ऐसी अपारदर्शी नीतियां नागरिकों के समानता और देश में स्वतंत्र रूप से आने-जाने के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करती हैं।
नए ‘भारतीय वायुयान अधिनियम, 2024’ से क्या बदलाव आएंगे?
विमानन क्षेत्र को आधुनिक बनाने के उद्देश्य से लाया गया नया कानून जनवरी 2025 में लागू हो चुका है, लेकिन इसके नियम अभी तैयार किए जा रहे हैं। अदालत ने मसौदे को देखने के बाद टिप्पणी की कि इसमें यात्रियों की शिकायतों के निवारण और किराए को नियंत्रित करने के लिए एक व्यवस्था का सुझाव दिया गया है। हालांकि, नियामक की स्वायत्तता और उसकी शक्तियों को लेकर स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है।
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि नए नियम लागू होने तक पुराने नियम प्रभावी रहेंगे। साथ ही कोर्ट ने कहा है कि यात्रियों के हितों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
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