वैश्विक अस्थिरता के बीच ब्रिक्स की भूमिका अहम: अजीत डोभाल

नई दिल्ली। वैश्विक स्तर पर बदलते राजनीतिक समीकरणों और अमेरिका व पश्चिमी देशों के साथ भारत के बढ़ते रणनीतिक संबंधों के बीच भी भारत ब्रिक्स (BRICS) संगठन को लेकर अपनी सक्रिय भूमिका बनाए हुए है और इसे और मजबूत करने के पक्ष में लगातार प्रयास कर रहा है।
इस प्रतिबद्धता की एक झलक मंगलवार को नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों (NSA) की 16वीं बैठक में देखने को मिली, जिसकी अध्यक्षता भारतीय एनएसए अजीत डोभाल ने की।
बैठक के दौरान डोभाल ने मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए ब्रिक्स की भूमिका को और अधिक प्रभावी बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने अमेरिका और ईरान के बीच हुए हालिया समझौते का स्वागत करते हुए कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य के पुनः सुचारु संचालन से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति व्यवस्था को मजबूती मिलेगी और उर्वरक सहित आवश्यक वस्तुओं की सप्लाई चेन में सुधार होगा।
डोभाल ने कहा कि भारत इस समझौते को लेकर “सतर्क आशावाद” रखता है और उम्मीद करता है कि इससे अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा सुरक्षा को स्थिरता मिलेगी।
उन्होंने आगे कहा कि आज दुनिया भू-राजनीतिक तनाव, आर्थिक दबाव और नई तकनीकों से उत्पन्न चुनौतियों का सामना कर रही है। ऐसे समय में बहुपक्षीय वैश्विक व्यवस्था कमजोर पड़ रही है, जिससे पारंपरिक समाधान पर्याप्त नहीं रह गए हैं। इसलिए ब्रिक्स जैसे मंचों की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है।
बैठक में सदस्य देशों के एनएसए और प्रतिनिधिमंडलों ने वैश्विक सुरक्षा से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की। इनमें ऊर्जा सुरक्षा, खाद्य आपूर्ति, सप्लाई चेन स्थिरता, साइबर सुरक्षा, आतंकवाद द्वारा नई तकनीकों के दुरुपयोग और जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न जोखिम प्रमुख रहे।
प्रतिनिधियों ने ब्रिक्स के आतंकवाद विरोधी संयुक्त कार्यसमूह और आईसीटी सुरक्षा से जुड़े कार्यसमूह की गतिविधियों और उपलब्धियों की समीक्षा भी की।
भारत ने इस दौरान सदस्य देशों के बीच सूचना साझा करने, क्षमता निर्माण और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के बीच सहयोग को और मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया। सभी देशों ने आतंकवाद के सभी रूपों के खिलाफ साझा प्रतिबद्धता दोहराई और इसके लिए तकनीक के दुरुपयोग को रोकने पर सहमति जताई।
बैठक के बाद सभी प्रतिनिधियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी मुलाकात की। इस उच्च स्तरीय बैठक में चीन के विदेश मंत्री वांग यी, रूस के एनएसए सर्गेई शोइगु, ईरान के डिप्टी सेक्रेटरी गादिर नेजामीपुर सहित कई शीर्ष अधिकारी शामिल हुए।
गौरतलब है कि इससे पहले मई 2026 में नई दिल्ली में आयोजित क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक के दौरान भी सभी सदस्य देशों के प्रतिनिधियों ने प्रधानमंत्री मोदी से संयुक्त रूप से मुलाकात की थी।
बैठक के दौरान ईरान के प्रतिनिधि ने एक स्कूल हमले में मारे गए बच्चों की तस्वीरों का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि अमेरिका और इजरायल की कार्रवाई के कारण यह स्थिति बनी, साथ ही उन्होंने क्षेत्रीय देशों की भूमिका पर भी सवाल उठाए।
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