सिर्फ आपराधिक केस चलने से नहीं छीना जा सकता पासपोर्ट का अधिकार, कलकत्ता HC का बड़ा फैसला

HIGHLIGHTS
- कलकत्ता हाई कोर्ट ने पासपोर्ट को नागरिक दस्तावेज बताया
- लंबित आपराधिक मामला पासपोर्ट रोकने का आधार नहीं माना
- विदेश यात्रा के लिए अदालत की पूर्व अनुमति जरूरी रहेगी
कोलकाता। कलकत्ता हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि किसी व्यक्ति के खिलाफ आपराधिक मामला लंबित होने मात्र से उसे पासपोर्ट जारी करने या उसका नवीनीकरण करने के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता।
न्यायमूर्ति कृष्ण राव की एकल पीठ ने बुधवार को कहा कि पासपोर्ट भी अन्य सरकारी दस्तावेजों की तरह एक नागरिक दस्तावेज है। केवल इस आशंका के आधार पर कि पासपोर्ट मिलने के बाद कोई व्यक्ति विदेश भाग सकता है, कानून की ऐसी व्याख्या नहीं की जा सकती।
अदालत ने स्पष्ट किया कि पासपोर्ट जारी करना और विदेश यात्रा की अनुमति देना दो अलग-अलग विषय हैं। विदेश जाने की अनुमति देना या उस पर रोक लगाना न्यायालय के अधिकार क्षेत्र में आ सकता है, जबकि पासपोर्ट की वैधता तय करना पासपोर्ट प्राधिकरण की प्रशासनिक जिम्मेदारी है।
कोर्ट ने यह भी कहा कि किसी कानून की ऐसी व्याख्या नहीं होनी चाहिए, जिससे नागरिकों के अधिकार अनावश्यक रूप से सीमित हों या अदालतों पर अतिरिक्त प्रशासनिक बोझ बढ़े।
अमित कुमार अग्रवाल के मामले में आया फैसला
यह मामला अमित कुमार अग्रवाल से जुड़ा है, जिनके खिलाफ प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) के तहत झारखंड के रांची स्थित विशेष अदालत में दो मामले लंबित हैं।
पासपोर्ट की अवधि समाप्त होने के बाद उन्होंने इसके नवीनीकरण के लिए आवेदन किया था। निचली अदालत ने कुछ शर्तों के साथ इसकी अनुमति दी थी, लेकिन पासपोर्ट प्राधिकरण ने यह कहते हुए केवल एक वर्ष का पासपोर्ट जारी करने की बात कही कि अदालत ने पासपोर्ट की अवधि स्पष्ट नहीं की है।
इसके बाद अमित कुमार अग्रवाल ने कलकत्ता हाई कोर्ट में याचिका दायर की। उनका कहना था कि सामान्य नियमों के अनुसार वयस्क नागरिकों को 10 वर्ष की अवधि वाला पासपोर्ट मिलना चाहिए, न कि केवल एक वर्ष का।
हाई कोर्ट ने दलील खारिज की
सुनवाई के दौरान विदेश मंत्रालय की ओर से वर्ष 1993 की अधिसूचना का हवाला देते हुए कहा गया कि यदि अदालत पासपोर्ट की अवधि का उल्लेख नहीं करती है तो एक वर्ष का पासपोर्ट जारी किया जा सकता है।
हालांकि, हाई कोर्ट ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया। अदालत ने कहा कि किसी भी कानून की ऐसी व्याख्या नहीं की जा सकती, जिससे नागरिकों के अधिकारों का अनावश्यक हनन हो या अदालतों पर प्रशासनिक कार्यों का अतिरिक्त बोझ पड़े।
कोर्ट ने कहा कि यदि किसी आरोपी का पासपोर्ट 10 वर्ष के लिए नवीनीकृत किया जाता है तो इससे जांच या न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित नहीं होगी। साथ ही, हर वर्ष पासपोर्ट नवीनीकरण के लिए अदालत जाने की आवश्यकता भी समाप्त हो जाएगी।
विदेश यात्रा के लिए अदालत की अनुमति जरूरी
हाई कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि 10 वर्ष की अवधि का पासपोर्ट मिलने का अर्थ यह नहीं है कि संबंधित व्यक्ति बिना अनुमति विदेश जा सकेगा।
अदालत ने कहा कि विदेश यात्रा के लिए संबंधित विशेष अदालत से पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य होगा और निचली अदालत द्वारा लगाई गई सभी शर्तें पहले की तरह लागू रहेंगी।
साथ ही कोर्ट ने पासपोर्ट प्राधिकरण को निर्देश दिया कि वह तीन सप्ताह के भीतर आवेदक का पासपोर्ट 10 वर्ष की अवधि के लिए नवीनीकृत करे।
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