ऑपरेशन सिंदूर पर पूर्व CDS अनिल चौहान का बड़ा बयान, बोले- हर बार बदलनी होगी रणनीति

HIGHLIGHTS
- विवेकानंद इंटरनेशनल फाउंडेशन में 'विमर्श' कार्यक्रम में बोले अनिल चौहान
- बार-बार एक ही रणनीति अपनाने से सफलता की संभावना घटने की बात कही
- उरी के बाद सर्जिकल स्ट्राइक और पुलवामा के बाद हवाई कार्रवाई का किया उल्लेख
पूर्व चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल अनिल चौहान ने सैन्य रणनीति में लगातार बदलाव की जरूरत पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि सैन्य बलों को सफलता और अचानक बढ़त बनाए रखने के लिए अपनी रणनीतियों में लगातार बदलाव करते रहना चाहिए।
मंगलवार को विवेकानंद इंटरनेशनल फाउंडेशन में ऑपरेशन सिंदूर और उसके बाद की स्थिति पर आयोजित 'विमर्श' कार्यक्रम में बोलते हुए जनरल चौहान ने सैन्य बल के इस्तेमाल के दौरान बार-बार एक ही तरीके पर निर्भर रहने से बचने की बात कही।
ऑपरेशन सिंदूर से पहले पीएम मोदी ने दिए थे क्या निर्देश?
पूर्व सीडीएस ने ऑपरेशन सिंदूर को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से हुई बातचीत का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी ने उन्हें केवल इतना कहा था कि उन पर तुरंत कोई राजनीतिक दबाव नहीं है और वे इसे अपने समय और हिसाब से करें। उन्होंने कहा कि सैन्य अभियान में विफलता का कोई कारण नहीं होना चाहिए, चाहे वह मानवीय हो या तकनीकी।
उन्होंने कहा कि उनके पास इस बात का सबूत होना चाहिए कि उन्होंने क्या किया है। पीएम मोदी ने कार्रवाई को लेकर खुली छूट दी थी। जनरल चौहान के मुताबिक सेना के लिए इससे बेहतर कुछ नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि सेना हमेशा स्पष्ट राजनीतिक निर्देश चाहती है और उन्हें यह मिला था।
सैन्य रणनीति में क्यों जरूरी है लगातार बदलाव?
पूर्व सीडीएस जनरल चौहान ने कहा कि जब भी किसी विकल्प का इस्तेमाल किया जाता है और उसी रणनीति को बार-बार दोहराया जाता है, तो सफलता की संभावना कम हो जाती है। उन्होंने कहा कि हर बार नई रणनीति के बारे में सोचना होगा।
जनरल चौहान ने सीमा पार आतंकवाद के जवाब में भारत की सैन्य कार्रवाइयों में आए बदलाव का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि अलग-अलग अभियानों में अलग-अलग माध्यमों का इस्तेमाल किया गया।
उन्होंने कहा कि उरी आतंकवादी हमले के बाद सर्जिकल स्ट्राइक की गई थी और उस समय जमीन का रास्ता अपनाया गया था। इसके बाद पुलवामा के बाद हवाई रास्ते का इस्तेमाल किया गया, जिसमें बड़े स्तर पर अभियान चलाया गया और करीब 40 से अधिक विमान शामिल थे।
उन्होंने कहा कि सिंदूर में तीसरे विकल्प का इस्तेमाल करने का फैसला किया गया, यानी कम ऊंचाई वाले हवाई क्षेत्र का इस्तेमाल करना। इसका मतलब था कि संघर्ष की सीमा को कम रखा जा सकता था, सफलता सुनिश्चित की जा सकती थी और फिर अचानक बढ़त भी हासिल की जा सकती थी।
जनरल चौहान ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर में कम ऊंचाई वाले हवाई क्षेत्र का इस्तेमाल एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा था। इससे संघर्ष की सीमा कम रखने, सफलता सुनिश्चित करने और अचानक बढ़त हासिल करने में मदद मिली।
राजनीति और युद्ध क्यों नहीं है अलग?
पूर्व सीडीएस ने कहा कि सैन्य शक्ति राजनीतिक इच्छाशक्ति का सीधा विस्तार है। उन्होंने कहा कि किसी देश के राजनीतिक हित सर्वोच्च होते हैं और सशस्त्र बल उन हितों की रक्षा के लिए उपलब्ध कई साधनों में से एक हैं।
उन्होंने कार्ल वॉन क्लॉजविट्ज के प्रसिद्ध सिद्धांत का जिक्र करते हुए कहा कि युद्ध दूसरे साधनों के जरिए राजनीति का विस्तार है। उन्होंने कहा कि राजनीति और युद्ध एक-दूसरे से अलग नहीं हैं। किसी देश के राजनीतिक हित सबसे महत्वपूर्ण होते हैं और सशस्त्र बल उनकी रक्षा के लिए काम करने वाले साधनों में से एक हैं। इसके लिए कई अन्य साधन भी मौजूद हैं।
प्रशिया के जनरल कार्ल वॉन क्लॉजविट्ज की 'ऑन वॉर' (वॉम क्रिगे) को आधुनिक पश्चिमी सैन्य सिद्धांत की प्रमुख कृतियों में माना जाता है। यह पुस्तक उनकी मृत्यु के बाद 1832 में उनकी पत्नी मैरी वॉन ब्रुहल ने प्रकाशित की थी। क्लॉजविट्ज ने नेपोलियन के खिलाफ अभियान में हिस्सा लिया था।
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