जनगणना की तैयारी तेज, डेटा रहेगा पूरी तरह गोपनीय; RTI के तहत भी नहीं होगा साझा

देश में प्रस्तावित जनगणना 2027 की तैयारियां अब रफ्तार पकड़ने लगी हैं। रजिस्ट्रार जनरल और जनगणना आयुक्त मृत्युंजय कुमार नारायण ने प्रेस वार्ता में भरोसा दिलाया कि इस बार जुटाई जाने वाली सभी व्यक्तिगत जानकारियां पूरी तरह सुरक्षित और गोपनीय रहेंगी। उन्होंने जनगणना अधिनियम की धारा 15 का जिक्र करते हुए कहा कि किसी भी व्यक्ति का डेटा न तो आरटीआई के तहत साझा किया जा सकता है, न अदालत में सबूत के रूप में इस्तेमाल होगा और न ही किसी अन्य एजेंसी को दिया जाएगा।
उन्होंने बताया कि जल्द ही कई राज्यों में पहले चरण यानी हाउस लिस्टिंग और हाउसिंग जनगणना का फील्डवर्क शुरू किया जाएगा। जनगणना हमेशा की तरह दो चरणों में पूरी होगी, लेकिन इस बार खास बात यह है कि पूरी प्रक्रिया डिजिटल माध्यम से संचालित की जाएगी, जिससे काम की गति और पारदर्शिता दोनों बढ़ेंगी।
अधिकारियों के मुताबिक, इस पूरी कवायद में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की अहम भूमिका होगी। स्थानीय प्रशासन को जमीनी स्तर तक सक्रिय किया जा रहा है। पिछली बार जनगणना 2011 में हुई थी, जबकि स्वतंत्रता के बाद यह देश की आठवीं जनगणना होगी।
जनगणना से पहले अधिकारियों को सख्त निर्देश भी जारी किए गए हैं। साफ कहा गया है कि लापरवाही, डेटा का गलत इस्तेमाल, कार्य में बाधा डालना या नागरिकों से अनुचित सवाल पूछना कानूनन अपराध माना जाएगा। ऐसे मामलों में जनगणना अधिनियम, 1948 के तहत जुर्माना और अधिकतम तीन साल की सजा हो सकती है। 17 मार्च को राज्यों को भेजे गए पत्र में इन नियमों की विस्तार से जानकारी दी गई है, जिसमें अपराध की गंभीरता के अनुसार 1,000 रुपये तक का जुर्माना और सजा का प्रावधान शामिल है।
इस बार की जनगणना में कुछ नए बदलाव भी देखने को मिलेंगे। उदाहरण के तौर पर, यदि कोई जोड़ा लिव-इन रिलेशनशिप में रह रहा है और अपने रिश्ते को स्थायी मानता है, तो उसे विवाहित श्रेणी में शामिल किया जा सकता है। यह जानकारी सेल्फ-एन्यूमरेशन पोर्टल पर दिए गए दिशा-निर्देशों में सामने आई है।
डिजिटल सिस्टम के तहत लोग खुद भी अपनी जानकारी ऑनलाइन दर्ज कर सकेंगे। इससे गणनाकर्मियों पर निर्भरता कम होगी और डेटा संग्रह की प्रक्रिया अधिक तेज व सटीक बनेगी।
हाउस लिस्टिंग चरण के दौरान कुल 33 प्रश्न पूछे जाएंगे, जिनमें परिवार और आवास से जुड़ी विभिन्न जानकारियां शामिल होंगी। यह चरण करीब 45 दिनों तक चलेगा और इसे 1 अप्रैल से 30 सितंबर के बीच अलग-अलग राज्यों में निर्धारित समय के अनुसार पूरा किया जाएगा। इस दौरान घर के मुखिया का लिंग—पुरुष, महिला या ट्रांसजेंडर—भी दर्ज किया जाएगा।
दूसरे चरण की शुरुआत फरवरी 2027 में होगी, जिसमें व्यक्तियों से जुड़ी विस्तृत जानकारी जैसे नाम, उम्र, जन्मतिथि, वैवाहिक स्थिति, शिक्षा, रोजगार, धर्म, जाति या जनजाति, विकलांगता और प्रवास से संबंधित विवरण जुटाए जाएंगे। इस प्रक्रिया में बेघर लोगों को भी शामिल किया जाएगा। पूरे अभियान में देशभर से लगभग 30 लाख गणनाकर्मी, पर्यवेक्षक और अन्य अधिकारी शामिल होंगे, जो सुरक्षित मोबाइल ऐप के जरिए घर-घर जाकर जानकारी एकत्र करेंगे।






















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