दीपावली 2026: कब करें मां लक्ष्मी की पूजा? जानें प्रदोष काल और निशीथ काल का शुभ समय

HIGHLIGHTS
- 8 नवंबर रविवार को मनाया जाएगा दीपावली का त्योहार।
- अमावस्या तिथि 8 नवंबर को सुबह 11:29 बजे से शुरू होगी।
- अमावस्या तिथि का समापन 9 नवंबर को सुबह 11:27 बजे होगा।
अमावस्या तिथि की शुरुआत 8 नवंबर, रविवार को सुबह 11 बजकर 29 मिनट पर होगी, जबकि इसका समापन 9 नवंबर, सोमवार को सुबह 11 बजकर 27 मिनट पर होगा। उदयातिथि के अनुसार कार्तिक अमावस्या 9 नवंबर को पड़ रही है। हालांकि, अमावस्या तिथि में प्रदोष काल 8 नवंबर को ही मिल रहा है। वहीं, 9 नवंबर को प्रदोष काल शुरू होने तक शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि लग जाएगी। इसी कारण इस वर्ष दीपावली का पर्व 8 नवंबर, रविवार को मनाया जाएगा, जबकि 9 नवंबर को स्नान और दान की सोमवती अमावस्या रहेगी।
प्रदोष काल में लक्ष्मी पूजा का शुभ मुहूर्त
दीपावली पर प्रदोष काल का समय 8 नवंबर, रविवार को शाम 5 बजकर 13 मिनट से रात 7 बजकर 49 मिनट तक रहेगा। इस दौरान वृषभ काल यानी स्थिर लग्न का समय शाम 5 बजकर 37 मिनट से शाम 7 बजकर 34 मिनट तक निर्धारित है।
मां लक्ष्मी की पूजा के लिए प्रदोष काल का शुभ समय शाम 5 बजकर 13 मिनट से रात 7 बजकर 49 मिनट तक रहेगा।
निशीथ काल में महालक्ष्मी पूजा का शुभ समय
श्री महालक्ष्मी की आराधना के लिए निशीथ काल को भी शुभ माना गया है। इस अवधि में पूजा करने का मुहूर्त रात 11 बजकर 17 मिनट से लेकर रात 12 बजकर 09 मिनट तक रहेगा।
दीपावली पर सुख, शांति और समृद्धि पाने के उपाय
मां लक्ष्मी को धन, ऐश्वर्य और वैभव की देवी माना जाता है। दीपावली के अवसर पर उनकी विधि-विधान से पूजा करने से भौतिक सुख-सुविधाओं की प्राप्ति होती है और घर में खुशहाली आती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, दीपावली पूजन के दौरान कुछ विशेष बातों का ध्यान रखने से मां लक्ष्मी की विशेष कृपा प्राप्त हो सकती है।
धार्मिक परंपराओं में आम के पेड़ को पवित्र और दैवीय वृक्ष का दर्जा दिया गया है। किसी भी शुभ धार्मिक कार्य की शुरुआत में आम की लकड़ी और पत्तों का इस्तेमाल किया जाता है। इसी परंपरा के अनुसार दीपावली पर घर के मुख्य दरवाजे और पूजा घर के प्रवेश द्वार पर गेंदे के फूलों तथा आम के पत्तों से बना तोरण लगाना शुभ माना जाता है। धार्मिक दृष्टि से इसका विशेष महत्व है। वहीं, वास्तु मान्यताओं के अनुसार भी यह घर में सकारात्मक ऊर्जा के आगमन का प्रतीक माना जाता है।
किसी भी धार्मिक और मांगलिक कार्य को शुरू करने से पहले स्वास्तिक का चिह्न बनाने की परंपरा है। इसका विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। दीपावली के दिन पूजा घर की दीवारों पर सिंदूर से स्वास्तिक बनाना शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। साथ ही मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है और परिवार में सुख-समृद्धि बढ़ती है।
दीपावली पूजा से जुड़े जरूरी नियम
1. उत्तर दिशा में करें लक्ष्मी पूजा
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार उत्तर दिशा को धन की दिशा माना जाता है। मां लक्ष्मी धन और वैभव की देवी हैं, इसलिए दीपावली पर उनकी पूजा उत्तर या उत्तर-पूर्व दिशा में करना शुभ माना जाता है। इस दौरान पूजा करने वाले व्यक्ति का मुख घर की उत्तर या पूर्व दिशा की ओर होना चाहिए।
2. हर साल नई मूर्तियों से करें पूजन
दीपावली पर मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा के लिए हर साल नई मूर्तियों का इस्तेमाल करना चाहिए। मान्यता के अनुसार, पिछले साल इस्तेमाल की गई पुरानी मूर्तियों से पूजा नहीं करनी चाहिए। हालांकि, यदि आपके पास चांदी की मूर्तियां हैं, तो उन्हें दोबारा गंगाजल से शुद्ध करके पूजा में शामिल किया जा सकता है।
3. पूजा में लाल रंग की वस्तुओं का करें इस्तेमाल
धार्मिक मान्यता है कि लाल रंग मां लक्ष्मी को बेहद प्रिय है। इसलिए दीपावली की पूजा में लाल रंग की वस्तुओं को विशेष स्थान देना चाहिए। इस दिन मां लक्ष्मी को लाल वस्त्र, लाल फूल और लाल श्रृंगार अर्पित करना शुभ माना जाता है। ऐसा करने से देवी मां प्रसन्न होती हैं और उनकी कृपा प्राप्त होती है।
4. रोली से बनाएं स्वास्तिक का चिह्न
दीपावली पर पूजा घर के दोनों ओर रोली से स्वास्तिक बनाना शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार स्वास्तिक को भगवान गणेश का स्वरूप माना गया है और इसे अत्यंत मंगलकारी प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि इससे घर में मौजूद नकारात्मक शक्तियों का प्रभाव समाप्त होता है।
5. लक्ष्मी पूजन के दौरान जरूर बजाएं शंख
दीपावली पर मां लक्ष्मी की पूजा में शंख का विशेष महत्व बताया गया है। शंख की ध्वनि को शुभ और पवित्र माना जाता है। इसलिए लक्ष्मी पूजन के समय शंख जरूर बजाना चाहिए। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इससे देवी-देवताओं का आशीर्वाद मिलता है और मन तथा मस्तिष्क में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
6. मिट्टी का दीपक जलाना माना जाता है शुभ
दीपावली पर मिट्टी के दीपक जलाने का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व है। मान्यता है कि मिट्टी के दीपक घर में सकारात्मकता और शांति लाते हैं। इनके प्रकाश से देवी-देवताओं की कृपा प्राप्त होती है और धन-समृद्धि में वृद्धि होती है। इसके अलावा दीपक जलाने से मानसिक सुकून मिलता है और ध्यान लगाने तथा एकाग्रता बढ़ाने में भी सहायता मिलती है। पर्यावरण की दृष्टि से भी मिट्टी के दीपकों का इस्तेमाल बेहतर माना जाता है।
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