ग्रैप-3 लागू होने के बाद भी दिल्ली की हवा जहरीली, कई शहरों में AQI 300 के पार

HIGHLIGHTS
- ग्रैप-3 लागू होने के बावजूद दिल्ली-NCR में प्रदूषण से राहत नहीं मिली।
- निगरानी वाले 33 केंद्रों में से 32 पर AQI 200 के पार दर्ज किया गया।
- 13 शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 300 से ऊपर रहा।
दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण की स्थिति लगातार चिंताजनक बनी हुई है। प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए ग्रैप-3 के तहत कड़े प्रतिबंध लागू होने के बावजूद हवा की गुणवत्ता में कोई खास सुधार नजर नहीं आ रहा है। कल से दिल्ली समेत एनसीआर के निगरानी वाले 33 केंद्रों में से 32 पर वायु गुणवत्ता खराब या बहुत खराब श्रेणी में दर्ज की गई है। इन सभी केंद्रों पर एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 200 से ऊपर बना हुआ है। इनमें 13 शहर ऐसे हैं, जहां एक्यूआई का स्तर 300 के पार पहुंच गया। वहीं, बल्लभगढ़ में प्रदूषण का स्तर 400 के पार दर्ज किया गया है।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़ों के मुताबिक, आज आनंद विहार के आसपास AQI 328 दर्ज किया गया, जो बहुत खराब श्रेणी में आता है। अक्षरधाम मंदिर के नजदीक वायु गुणवत्ता सूचकांक 336 रहा। वहीं, इंडिया गेट के आसपास प्रदूषण का स्तर और अधिक गंभीर नजर आया, जहां एक्यूआई 398 दर्ज किया गया।
प्रदूषण की सबसे बड़ी चिंताओं में हवा में पीएम 2.5 कणों की मौजूदगी भी शामिल है। ये सूक्ष्म कण कई गंभीर और जानलेवा बीमारियों की वजह बन सकते हैं। दिल्ली में शनिवार को कुल 59 निगरानी केंद्रों में से 16 पर हवा गंभीर श्रेणी में रही, जबकि 29 केंद्रों पर एक्यूआई बहुत खराब दर्ज किया गया। सबसे अधिक प्रदूषण आईआईटी दिल्ली के आसपास देखने को मिला, जहां AQI 452 तक पहुंच गया था।
हालांकि, शाम 7 बजे तक प्रदूषण के स्तर में कुछ कमी दर्ज की गई। इस दौरान बहुत खराब श्रेणी वाले निगरानी केंद्रों की संख्या घटकर 20 रह गई। इसके बावजूद आईआईटी दिल्ली के आसपास एक्यूआई 440 दर्ज किया गया।
आज हवा के और गंभीर होने की आशंका
एनसीआर के कई प्रमुख शहरों में प्रदूषण का स्तर बहुत खराब श्रेणी में बना हुआ है। इनमें गुरुग्राम, फरीदाबाद, बल्लभगढ़, बहादुरगढ़, हापुड़, खोड़ा और भिवाड़ी शामिल हैं। बल्लभगढ़ में स्थिति सबसे ज्यादा चिंताजनक रही, जहां प्रदूषण गंभीर श्रेणी में पहुंच गया। यहां शाम 7 बजे एक्यूआई का स्तर 409 रिकॉर्ड किया गया।
वहीं, गाजियाबाद, नोएडा और ग्रेटर नोएडा समेत 19 शहरों में AQI 200 से 300 के बीच दर्ज किया गया, जो खराब श्रेणी में आता है। दिवाली के जश्न, वाहनों से निकलने वाले धुएं और पराली जलाने की घटनाओं के चरम दौर को देखते हुए पूरे दिल्ली-एनसीआर में वायु गुणवत्ता के गंभीर स्तर तक पहुंचने की आशंका जताई गई है।
प्रदूषण में वाहनों के धुएं की हिस्सेदारी 21.4%
डिसीजन सपोर्ट सिस्टम की रिपोर्ट के अनुसार, शनिवार को दिल्ली के प्रदूषण में सबसे अधिक योगदान परिवहन क्षेत्र का रहा। कुल प्रदूषण में वाहनों से होने वाले उत्सर्जन की हिस्सेदारी 21.4 प्रतिशत दर्ज की गई। दूसरी ओर, पराली जलाने से निकलने वाले धुएं का योगदान 1.7 प्रतिशत रहा। अनुमान है कि रविवार को यह हिस्सेदारी बढ़कर 5.4 प्रतिशत तक पहुंच सकती है।
उपग्रह से प्राप्त आंकड़ों के मुताबिक, शुक्रवार को छह राज्यों में पराली जलाने की कुल 589 घटनाएं सामने आईं। इनमें सबसे ज्यादा 357 मामले अकेले पंजाब में दर्ज किए गए।
पीएम 2.5 की मौजूदगी बनी सबसे बड़ी चिंता
दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण की स्थिति को देखते हुए ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) के तीसरे चरण यानी ग्रैप-3 के तहत कड़े प्रतिबंध लागू हैं। इसके अंतर्गत बीएस-6 श्रेणी के अलावा अन्य श्रेणियों के भारी वाहनों के संचालन पर रोक लगाई गई है। इसके साथ ही निर्माण और तोड़फोड़ से संबंधित गतिविधियों पर भी पूरी तरह प्रतिबंध है।
इन सख्त पाबंदियों के लागू होने के बाद भी हवा में पीएम 2.5 प्रमुख प्रदूषक बना हुआ है। पीएम 2.5 के सूक्ष्म कण स्वास्थ्य के लिए बेहद नुकसानदायक होते हैं और कई गंभीर बीमारियों का कारण बन सकते हैं। ऐसे में ग्रैप-3 के प्रतिबंधों के बावजूद प्रदूषण का लगातार ऊंचे स्तर पर बने रहना चिंता का विषय बना हुआ है।
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