रॉबर्ट वाड्रा से जुड़े शिकोहपुर लैंड डील केस में ED ने मांगा और समय, 23 सितंबर को अगली सुनवाई
By Hitesh — August 21, 2026

HIGHLIGHTS
- ईडी ने राउज एवेन्यू कोर्ट में मामले की स्टेटस रिपोर्ट दाखिल की।
- जांच एजेंसी ने दस्तावेजों की सूची उपलब्ध कराने के लिए तीन सप्ताह का समय मांगा।
- अदालत ने अगली सुनवाई के लिए 23 सितंबर की तारीख तय की।
Author: — Dainik Dehat
नई दिल्ली। रॉबर्ट वाड्रा से जुड़े शिकोहपुर जमीन सौदे में मनी लॉन्ड्रिंग की जांच कर रहे प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने राउज एवेन्यू कोर्ट में स्टेटस रिपोर्ट दाखिल की है। ईडी ने अदालत को बताया कि जांच पूरी करने के लिए उसे अभी कुछ और समय की आवश्यकता है।
ईडी ने कहा कि शिकोहपुर जमीन सौदे में डीएलएफ की भूमिका से जुड़े मामले की जांच जारी है। इस बीच, जांच एजेंसी ने आरोपियों को संबंधित दस्तावेज उपलब्ध करा दिए हैं।
डेढ़ दशक पुराना है शिकोहपुर जमीन सौदे का मामला
ईडी ने दस्तावेजों की सूची उपलब्ध कराने के लिए अदालत से तीन सप्ताह का समय मांगा। एजेंसी ने बताया कि मामले की जांच अभी जारी है। अदालत ने ईडी को समय देते हुए अगली सुनवाई के लिए 23 सितंबर की तारीख तय की है।
रॉबर्ट वाड्रा से जुड़ा गुरुग्राम के शिकोहपुर जमीन सौदे का मामला करीब डेढ़ दशक पुराना है। अब ईडी की मनी लॉन्ड्रिंग जांच और अदालत की कार्रवाई के चलते यह मामला एक बार फिर चर्चा में है। अप्रैल 2026 में दिल्ली की एक अदालत ने ईडी की ओर से दाखिल अभियोजन शिकायत पर संज्ञान लेते हुए वाड्रा और अन्य आरोपियों के खिलाफ आगे की कार्यवाही के लिए पर्याप्त सामग्री होने की बात कही थी।
पूरा मामला क्या है?
मामला गुरुग्राम के शिकोहपुर गांव में करीब 3.53 एकड़ जमीन से जुड़ा है। फरवरी 2008 में रॉबर्ट वाड्रा की कंपनी स्काईलाइट हॉस्पिटैलिटी प्राइवेट लिमिटेड ने यह जमीन ओंकारेश्वर प्रॉपर्टीज से 7.5 करोड़ रुपये में खरीदी थी।
ईडी का आरोप है कि जमीन खरीद के समय बिक्री दस्तावेज में भुगतान को लेकर गलत जानकारी दी गई थी। एजेंसी के मुताबिक, भुगतान के लिए दिखाया गया चेक दूसरी कंपनी से जुड़ा था और उसे कभी भुनाया नहीं गया।
ईडी ने लगाए क्या आरोप?
इसके बाद जमीन के इस्तेमाल के लिए वाणिज्यिक लाइसेंस की प्रक्रिया शुरू हुई। ईडी का आरोप है कि नियमों को दरकिनार करते हुए लाइसेंस की प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ाया गया। जमीन का लाइसेंस मिलने और विकास की संभावनाएं बढ़ने के बाद उसकी कीमत में काफी इजाफा हुआ।
जून 2008 में डीएलएफ ने इस जमीन को करीब 58 करोड़ रुपये में खरीदने पर सहमति जताई। इस तरह 7.5 करोड़ रुपये में खरीदी गई जमीन की कीमत कुछ ही महीनों में कई गुना बढ़ गई।
ईडी का आरोप है कि डीएलएफ से प्राप्त 58 करोड़ रुपये अपराध से हुई आय यानी ‘प्रोसीड्स ऑफ क्राइम’ थे। बाद में इस रकम का इस्तेमाल वाड्रा से जुड़ी कंपनियों के जरिए अलग-अलग संपत्तियों और वित्तीय देनदारियों में किया गया। ईडी ने पीएमएलए के तहत इसे मनी लॉन्ड्रिंग का मामला माना।
वाड्रा समेत पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के खिलाफ भी दर्ज हुई थी FIR
मामले की शुरुआती जांच के दौरान 2012 में तत्कालीन आईएएस अधिकारी अशोक खेमका की ओर से जमीन के म्यूटेशन को लेकर आपत्ति और कार्रवाई भी सामने आई थी। इसके बाद 2018 में हरियाणा पुलिस ने वाड्रा, तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा, डीएलएफ और अन्य के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी। इसमें आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, जालसाजी और भ्रष्टाचार से जुड़े आरोप लगाए गए थे।
ईडी ने जुलाई 2025 में इस मामले में अभियोजन शिकायत दाखिल की थी। एजेंसी ने वाड्रा समेत कई लोगों और कंपनियों को आरोपी बनाया था और उनसे जुड़ी 43 संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क करने की कार्रवाई भी की थी। वाड्रा की ओर से इन आरोपों को राजनीतिक प्रतिशोध बताया गया है।
अदालत में लंबित हैं तमाम मामले
इन सभी आरोपों का अदालत में साबित होना अभी बाकी है। 2023 में हरियाणा सरकार ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में एक हलफनामे में कहा था कि डीएलएफ को जमीन के हस्तांतरण में कोई नियम नहीं तोड़ा गया था।
ऐसे में मामले में ईडी के आरोप, बचाव पक्ष का पक्ष और अदालत में चल रही आगे की कार्यवाही—तीनों को अलग-अलग समझना जरूरी है।
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