मुजफ्फरनगर में नकली DEF कारोबार पर शिकंजा, रातों-रात गायब हुए कई प्वाइंट

मुजफ्फरनगर में कथित नकली DEF (डीजल एग्जॉस्ट फ्लूड) कारोबार को लेकर हाल ही में प्रकाशित रिपोर्टों और प्रशासनिक सक्रियता का असर अब जमीनी स्तर पर दिखाई देने लगा है। यूरिया की कालाबाजारी और संदिग्ध DEF नेटवर्क पर कार्रवाई की खबरों के बाद कई स्थानों पर संचालित DEF प्वाइंट अचानक बंद हो गए हैं।
दिल्ली-देहरादून राष्ट्रीय राजमार्ग-58 पर नई मंडी कोतवाली क्षेत्र के बागोवाली चौकी के आसपास स्थित कुछ DEF प्वाइंट, जो पिछले दिनों तक सक्रिय नजर आ रहे थे, अब पूरी तरह खाली दिखाई दे रहे हैं। स्थानीय लोगों के मुताबिक वहां लगे नोजल, टैंक और अन्य उपकरण हटा लिए गए हैं। कुछ स्थानों पर पहले उपकरणों को काली पॉलिथीन से ढका गया था, लेकिन अब वे भी मौके से गायब हैं।

हाईवे किनारे संचालित अन्य कई DEF केंद्रों पर भी गतिविधियां ठप पड़ गई हैं। क्षेत्रवासियों का कहना है कि जिन स्थानों पर कुछ दिन पहले तक नियमित कारोबार होता दिखाई देता था, वहां अब सन्नाटा पसरा हुआ है।
गौरतलब है कि हाल के दिनों में पुलिस और कृषि विभाग ने यूरिया की कथित कालाबाजारी के मामलों में कार्रवाई की थी। इसके बाद यह आशंका जताई गई थी कि किसानों के लिए सब्सिडी पर उपलब्ध कराए जाने वाले यूरिया का उपयोग अवैध रूप से DEF तैयार करने में किया जा रहा है। इस संबंध में विभिन्न स्तरों पर जांच भी जारी है।

जानकारों का मानना है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश, विशेषकर मुजफ्फरनगर, लंबे समय से DEF कारोबार का एक महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता रहा है। ऐसे में प्रशासनिक सख्ती और निगरानी बढ़ने के बाद कई कारोबारी फिलहाल सार्वजनिक गतिविधियों से दूरी बनाए हुए हैं।
सूत्रों के अनुसार, जांच एजेंसियां केवल यूरिया की आपूर्ति और उपयोग की ही पड़ताल नहीं कर रहीं, बल्कि उससे जुड़े संभावित नेटवर्क, सप्लाई चैन और वित्तीय लेन-देन की भी जांच कर रही हैं। माना जा रहा है कि इसी कारण कई संदिग्ध प्वाइंट संचालकों ने अपने उपकरण हटाने या कारोबार अस्थायी रूप से बंद करने का फैसला लिया है।
हालांकि, संबंधित विभागों की ओर से अभी तक इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। जांच जारी है और प्रशासन की नजर पूरे नेटवर्क पर बनी हुई है।
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