मुजफ्फरनगर में चकबंदी के खिलाफ किसानों का धरना, अनिश्चितकालीन आंदोलन का ऐलान

HIGHLIGHTS
- विकास शर्मा के नेतृत्व में नंगला, न्यामू और आसपास के गांवों के किसान कलेक्ट्रेट पहुंचे।
- किसानों ने धरना स्थल पर रात में रुकने और भोजन-पानी की व्यवस्था की।
- चकबंदी प्रक्रिया में करोड़ों रुपये की कथित धांधली का आरोप लगाया गया।
मुजफ्फरनगर। मुजफ्फरनगर में चकबंदी विभाग में कथित धांधली और भ्रष्टाचार के विरोध में किसानों ने आर-पार की लड़ाई का ऐलान किया है। भारतीय किसान यूनियन नेता विकास शर्मा के नेतृत्व में नंगला, न्यामू और आसपास के गांवों के बड़ी संख्या में किसान रविवार दोपहर करीब 12 बजे कलेक्ट्रेट पहुंचे। किसानों ने चकबंदी दफ्तर के बाहर अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया।
इस बार किसान केवल प्रदर्शन करने नहीं पहुंचे, बल्कि लंबे आंदोलन की तैयारी के साथ कलेक्ट्रेट में डेरा डाल दिया। किसान अपने साथ चारपाई, मच्छरदानी, बर्तन, भट्टी, हलवाई और पानी का टैंकर तक लेकर पहुंचे हैं।
धरने पर बैठे किसानों ने चकबंदी प्रक्रिया में बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के आरोप लगाए। किसानों का दावा है कि इस पूरी प्रक्रिया में करोड़ों रुपये की कथित धांधली हुई है। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने के साथ दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
चकबंदी अधिकारी की नेम प्लेट उतारने का वीडियो
धरने के दौरान चकबंदी अधिकारी के कार्यालय के बाहर लगी नेम प्लेट उतारते हुए एक किसान कैमरे में कैद हो गया। किसानों का आरोप है कि जिन पटवारियों और कानूनगो के खिलाफ कार्रवाई की गई है या जिन्हें निलंबित कर हटाया जा चुका है, वे कथित तौर पर अब भी गांवों में सक्रिय हैं और किसानों से जुड़े मामलों में हस्तक्षेप कर रहे हैं।
किसानों ने आरोप लगाया कि इस व्यवस्था में भू-माफियाओं को संरक्षण दिया जा रहा है, जबकि आम किसान अपने अधिकारों के लिए अधिकारियों के चक्कर काट रहा है।
बोले- शिकायतों पर सिर्फ आश्वासन मिला
किसानों का कहना है कि वे कई बार प्रशासन और संबंधित अधिकारियों के सामने अपनी शिकायतें रख चुके हैं। हर बार उन्हें कार्रवाई का आश्वासन मिला, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। किसानों का आरोप है कि कार्रवाई के नाम पर उन्हें लगातार गुमराह किया गया। इसी नाराजगी के चलते इस बार उन्होंने अनिश्चितकालीन धरना देने का फैसला किया है।
रात में रुकने और खाने तक की पूरी व्यवस्था
आंदोलन लंबा चलने की संभावना को देखते हुए किसानों ने धरना स्थल पर ही रहने और खाने-पीने की व्यवस्था कर ली है। चारपाइयां बिछाई गई हैं और रात में रुकने के लिए मच्छरदानियां लगाई गई हैं। भोजन तैयार करने के लिए बर्तन और भट्टी के साथ हलवाई भी लाया गया है। पीने के पानी के लिए टैंकर की व्यवस्था भी की गई है।
17 सितंबर की पंचायत में तय होगी अगली रणनीति
किसानों ने चेतावनी दी है कि चकबंदी प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच और कथित दोषियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई होने तक धरना समाप्त नहीं किया जाएगा। उनका कहना है कि आंदोलन फिलहाल 72 घंटे तक पूरी ताकत के साथ जारी रहेगा।
इसके बाद आंदोलन की अगली रणनीति पर 17 सितंबर को मुजफ्फरनगर के जीआईसी मैदान में प्रस्तावित किसान पंचायत में निर्णय लिया जाएगा। किसानों ने संकेत दिया है कि मांगों पर कार्रवाई नहीं होने की स्थिति में आंदोलन को और व्यापक किया जा सकता है।
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