1020 करोड़ के भ्रष्टाचार मामले में पूर्व मंत्री केएन नेहरू समेत 13 पर एफआईआर

HIGHLIGHTS
- डीवीएसी ने केएन नेहरू समेत 13 लोगों पर एफआईआर दर्ज की
- सरकारी टेंडर में गड़बड़ी और रिश्वत लेने के आरोप
- मामले में 1,020 करोड़ रुपये के अवैध फायदे का दावा
डीवीएसी ने पूर्व मंत्री केएन नेहरू को मुख्य आरोपी बनाते हुए 12 अन्य लोगों के खिलाफ 1,020 करोड़ रुपये के भ्रष्टाचार मामले में एफआईआर दर्ज की है। मामले में सरकारी टेंडरों में कथित गड़बड़ी करने और रिश्वत लेने के आरोप लगाए गए हैं।
क्या आरोप है?
एफआईआर में डीएमके नेता के भाइयों के साथ डीएमके के दो पूर्व विधायकों एस. सुदर्शनम और जे.जे. एबेनेजर के नाम भी शामिल हैं। आरोप है कि उन्होंने ठेकेदारों की सिफारिश करने, टेंडर से जुड़ी जानकारी साझा करने और कथित तौर पर रिश्वत की रकम का हिसाब-किताब करने में भूमिका निभाई।
सतर्कता और भ्रष्टाचार विरोधी निदेशालय के दस्तावेज में दावा किया गया है कि डीएमके नेता ने वरिष्ठ नौकरशाहों तक पहुंच बनाने में मदद की और टेंडर देने की प्रक्रिया को प्रभावित किया।
दस्तावेज में क्या बताया गया है?
दस्तावेज के मुताबिक, नगर प्रशासन और जलापूर्ति विभाग के पूर्व मंत्री ने अपने भाइयों को करीबी सहयोगी के साथ मिलकर ठेकेदारों और सरकारी कर्मचारियों से पार्टी फंड के नाम पर अवैध रकम वसूलने की अनुमति दी थी।
कितने करोड़ रुपये का फायदा उठाया गया?
दस्तावेज में कहा गया है कि इस तरीके से 1,020 करोड़ रुपये का अवैध फायदा उठाया गया। कथित तौर पर यह रकम कॉन्ट्रैक्ट की कुल कीमत के 7.5 से 10 प्रतिशत के बराबर थी और इसे पार्टी फंड के तौर पर वसूला गया।
प्रवर्तन निदेशालय की 258 पन्नों की रिपोर्ट के आधार पर डीवीएसी की जांच के बाद शुक्रवार को मामला दर्ज किया गया। रिपोर्ट में 2021 से 2025 के बीच सरकारी कॉन्ट्रैक्ट में गड़बड़ी के आरोप लगाए गए थे।
इसमें नेहरू को मुख्य आरोपी बताया गया है। उनके भाई के.एन. मणिवन्नन और एन. रविचंद्रन पर कथित अवैध रिश्वत की वसूली और उसके वितरण में समन्वय करने का आरोप है।
दस्तावेज में आगे दावा किया गया है कि नेहरू ने अपने भाइयों को अपने करीबी सहयोगी कवि प्रसाद के साथ समन्वय करने की अनुमति दी, ताकि ठेकेदारों और लोक सेवकों से कथित अवैध रिश्वत एकत्र की जा सके। इसमें अविनासी और तिरुप्पुर स्थित कुछ फर्मों के नाम भी लिए गए हैं, जिन्होंने पैसा मुहैया कराया था।
कोयंबटूर के नगर नियोजन अधिकारी पर क्या आरोप लगा?
कोयंबटूर के नगर नियोजन अधिकारी और तिरुप्पुर के क्षेत्रीय इंजीनियरों पर भी नगरपालिका के कामों में मदद करने और रिश्वत लेने के आरोप लगाए गए हैं। मामले के दस्तावेज में चेन्नई की एक कंस्ट्रक्शन फर्म के मालिक और पदाधिकारियों के साथ-साथ अज्ञात अधिकारियों के नाम भी शामिल हैं।
यह दस्तावेज 6 सितंबर 2021 को सुदर्शनम और प्रसाद के बीच हुई व्हाट्सएप बातचीत और एबेनेजर की बातचीत पर आधारित है। यह मामला 3 दिसंबर 2025 की ईडी रिपोर्ट से शुरू हुआ था। मणिवन्नन के फोन से रसीदें भी बरामद की गईं।
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