विदेशी टेरर फंडिंग नेटवर्क का खुलासा, सीआईके ने तीन आरोपियों के खिलाफ जारी कराया गिरफ्तारी वारंट

HIGHLIGHTS
- सीआईके की जांच में सामने आया कि कथित फंडिंग नेटवर्क के तार दुबई, पीओके और यूके से जुड़े हैं।
- एजेंसी के अनुसार मक्का में हवाला के जरिए धन लेन-देन किए जाने का आरोप लगाया गया है।
- मामले में तीनों आरोपियों के खिलाफ यूएपीए और बीएनएस की विभिन्न धाराओं के तहत कार्रवाई की गई है।
श्रीनगर। काउंटर इंटेलिजेंस एजेंसी कश्मीर (सीआईके) ने विदेशी टेरर फंडिंग नेटवर्क का पर्दाफाश करने का दावा किया है। जांच में दुबई, पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) और यूनाइटेड किंगडम में मौजूद मोहम्मद इकबाल नैमा उर्फ अनीस, मुख्तार अहमद बाबा और शमीमा शॉल की भूमिका सामने आई है। एजेंसी के अनुसार तीनों पर जम्मू-कश्मीर में आतंकियों, अलगाववादियों और उनके मददगारों (ओजीडब्ल्यू) तक धन पहुंचाने के लिए मक्का में 13,600 सऊदी रियाल जमा कराने का आरोप है। सीआईके सूत्रों का कहना है कि यह रकम बढ़कर 10 लाख सऊदी रियाल तक पहुंच सकती है, जिसकी भारतीय मुद्रा में अनुमानित कीमत करीब 2.53 करोड़ रुपये है।
टीआरएफ से जुड़े होने का दावा
मामले में सीआईके की विशेष अदालत ने मंगलवार को तीनों आरोपियों की गिरफ्तारी के आदेश जारी किए। टाडा/पोटा और एनआईए एक्ट से जुड़े मामलों की सुनवाई करने वाले श्रीनगर के एडिशनल सेशन जज एवं स्पेशल जज मंजीत राय ने उनके खिलाफ वारंट जारी किया। एजेंसी के अनुसार मुख्तार अहमद बाबा प्रतिबंधित आतंकी संगठन द रेजिस्टेंस फ्रंट (टीआरएफ) से जुड़ा हुआ है और पाकिस्तान से अपनी गतिविधियां संचालित कर रहा है।
जांच में यह भी सामने आया कि श्रीनगर के एक ही परिवार के इरफान गुल, शाजिया नजीर और रियाज अहमद गोजरी ने पिछले वर्ष जनवरी में उमरा के बहाने सऊदी अरब की यात्रा की थी। सीआईके का दावा है कि वहां उन्होंने मुख्तार अहमद बाबा के सहयोगियों से संपर्क किया और आतंकियों व अलगाववादियों तक पहुंचाने के लिए धन प्राप्त किया।
दुबई की शिपिंग कंपनी में कार्यरत है नैमा
जांच के मुताबिक, बटमालू निवासी मोहम्मद इकबाल नैमा उर्फ अनीस वर्तमान में दुबई की एक शिपिंग कंपनी में ऑपरेशनल मैनेजर के पद पर कार्यरत है। रिपोर्ट के अनुसार उसने शमीमा शॉल का मोबाइल नंबर रियाज अहमद गोजरी को उपलब्ध कराया। इसके बाद गोजरी ने शॉल से संपर्क कर मक्का में हवाला के जरिए 13,600 सऊदी रियाल प्राप्त किए। इस राशि में से 1,500 सऊदी रियाल इरफान गुल को दिए गए। एजेंसी का कहना है कि इस लेन-देन का उद्देश्य भारत में आतंकी और राष्ट्रविरोधी गतिविधियों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना था।
लश्कर-ए-ताइबा के प्रशिक्षण शिविरों से जुड़ा रहा बाबा
सीआईके के अनुसार मुख्तार अहमद बाबा वर्ष 2018 में तुर्की गया और बाद में पाकिस्तान पहुंच गया, जहां वह मुरिदके स्थित लश्कर-ए-ताइबा के प्रशिक्षण शिविरों में सक्रिय रहा। अदालत को यह भी बताया गया कि जुलाई 2021 में जम्मू-कश्मीर सीआईडी ने उसके खिलाफ लुकआउट सर्कुलर जारी किया था। इसके अलावा पिछले वर्ष सितंबर में श्रीनगर के चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट ने एक अन्य मामले में उसके खिलाफ सामान्य गिरफ्तारी वारंट भी जारी किया था।
हुर्रियत कॉन्फ्रेंस की प्रतिनिधि बताई गई शमीमा
जांच एजेंसी के मुताबिक, बारामूला की रहने वाली शमीमा शॉल वर्ष 1992 में पाकिस्तान चली गई थी और बाद में यूनाइटेड किंगडम में बस गई। एजेंसी ने उसे एक प्रमुख अलगाववादी नेता तथा ऑल पार्टीज हुर्रियत कॉन्फ्रेंस की प्रतिनिधि बताया है। सीआईके का दावा है कि वह भारत विरोधी गतिविधियों में शामिल रही है। एजेंसी के अनुसार तीनों आरोपियों को संबंधित अधिकारियों और उनके परिजनों के माध्यम से पेश होने के लिए नोटिस भेजे गए थे, लेकिन वे जांच में शामिल नहीं हुए।
इन धाराओं के तहत दर्ज है मामला
तीनों आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 61(2) तथा गैर-कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) की धाराओं 13, 38, 39 और 40 के तहत मामला दर्ज किया गया है। बीएनएस की धारा 61(2) आपराधिक षड्यंत्र से संबंधित है। वहीं, यूएपीए की धारा 13 गैरकानूनी गतिविधियों, धारा 38 आतंकी संगठन की सदस्यता, धारा 39 आतंकी संगठन को समर्थन देने और धारा 40 आतंकी संगठन के लिए धन जुटाने तथा देश की सुरक्षा और शांति के विरुद्ध गतिविधियों से जुड़े मामलों में लागू होती है।
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