बृजभूषण शरण सिंह की बरी होने के फैसले को चार महिला पहलवानों ने दी चुनौती

HIGHLIGHTS
- चार महिला पहलवानों ने सत्र अदालत का रुख किया।
- अपील में बृजभूषण शरण सिंह के साथ विनोद तोमर का भी नाम है।
- दोनों को निचली अदालत ने मामले में बरी किया था।
नई दिल्ली। यौन उत्पीड़न मामले में पूर्व भारतीय कुश्ती महासंघ (डब्ल्यूएफआई) प्रमुख बृजभूषण शरण सिंह को बरी किए जाने के फैसले के खिलाफ चार महिला पहलवानों ने सत्र अदालत का रुख किया है। महिला पहलवानों ने निचली अदालत के फैसले को चुनौती देते हुए अपील दायर की है।
अपील में महिला पहलवानों ने दावा किया है कि निचली अदालत का फैसला अनुमान और अटकलों पर आधारित है। उनका कहना है कि फैसले में स्थापित कानूनी सिद्धांतों को सही तरीके से लागू नहीं किया गया। उन्होंने यह भी कहा है कि फैसले के कुछ हिस्सों में यौन उत्पीड़न की पीड़िताओं के व्यवहार को लेकर पुरानी धारणाओं को आधार बनाया गया है। महिला पहलवानों ने अदालत से उनकी अपील पर विचार करने की मांग की है।
दरअसल, दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने बृजभूषण शरण सिंह और विनोद तोमर को मामले में बरी कर दिया था। इस फैसले के खिलाफ अब महिला पहलवानों ने अपील दाखिल की है।
शनिवार को हो सकती है सुनवाई
इस अपील पर विशेष न्यायाधीश दिग विनय सिंह की अदालत में शनिवार यानी 26 सितंबर को सुनवाई होने की संभावना है। महिला पहलवानों ने अपनी याचिका में ट्रायल कोर्ट के फैसले को कानून की नजर में टिकाऊ नहीं बताया है। उनका आरोप है कि मामले में उपलब्ध सबूतों का गलत और चुनिंदा तरीके से आकलन किया गया।
3 अगस्त को बृजभूषण शरण सिंह हुए थे बरी
राउज एवेन्यू कोर्ट की एडिशनल चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट अश्विनी पंवार की अदालत ने 3 अगस्त 2026 को बृजभूषण शरण सिंह और विनोद तोमर को मामले में बरी कर दिया था। यह मामला छह महिला पहलवानों की शिकायतों से जुड़ा था।
फैसले के बाद बृजभूषण शरण सिंह ने इसे अपने लिए बड़ी राहत बताया था। उन्होंने अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को खारिज करते हुए कहा था कि उन्होंने खुद को कभी अपराधी नहीं माना।
यह था पूरा मामला
यह मामला 18 जनवरी 2023 को सामने आया था। इसके बाद करीब 30 पहलवानों ने भारतीय कुश्ती महासंघ के तत्कालीन अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ जंतर-मंतर पर धरना दिया था। विनेश फोगाट, साक्षी मलिक और बजरंग पूनिया भी इसमें शामिल थे। पहलवानों ने बृजभूषण शरण सिंह पर यौन शोषण के आरोप लगाए थे। खेल मंत्रालय ने उस समय एक समिति का गठन किया था।
- 21 अप्रैल 2023 को दिल्ली पुलिस को नाबालिग समेत सात महिला पहलवानों ने यौन शोषण की शिकायत दी थी। इसके बाद पहलवानों ने उच्चतम न्यायालय का भी रुख किया।
- 4 मई 2023 को उच्चतम न्यायालय में मामले की सुनवाई हुई। अदालत ने महिला खिलाड़ियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
- 28 मई 2023 को नए संसद भवन के उद्घाटन के दौरान पहलवानों ने मामले को लेकर जुलूस निकाला। दिल्ली पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया।
- 30 मई 2023 को पहलवान अपने पदक बहाने के लिए हरिद्वार पहुंचे। अधिकारियों के समझाने के बाद उन्होंने अपना फैसला टाल दिया।
- 7 जून 2023 को केंद्रीय खेल मंत्री और पहलवानों के बीच बैठक हुई।
आरोप पत्र और पॉक्सो मामले का समापन
15 जून 2023 को दिल्ली पुलिस ने बृजभूषण सिंह और भारतीय कुश्ती महासंघ के तत्कालीन सहायक सचिव विनोद तोमर के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया। इसके बाद मामले में नया मोड़ आया। नाबालिग पहलवान और उसके पिता ने अपने बयान बदल दिए। इसके बाद पुलिस ने नाबालिग पहलवान से जुड़े पॉक्सो मामले में समापन रिपोर्ट दाखिल की। जुलाई 2023 में अदालत ने बृजभूषण को अस्थायी जमानत दी थी।
आरोप तय होने के बाद मुकदमा जारी रहा
मई 2024 में राउज एवेन्यू अदालत ने बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ यौन उत्पीड़न, महिला की गरिमा भंग करने और आपराधिक धमकी समेत कई आरोप तय किए थे। बृजभूषण शरण सिंह ने आरोपों को स्वीकार करने से इनकार किया था। अदालत में जब उनसे पूछा गया कि क्या वह अपनी गलती मानते हैं, तो उन्होंने कहा था, 'कोई सवाल ही नहीं है। जब गलती नहीं की तो उसे मानें क्यों।'
वर्ष 2025 में दोनों पक्षों की दलीलें चलीं। पॉक्सो मामले में दिल्ली पुलिस की समापन रिपोर्ट अदालत ने स्वीकार कर ली और यह मामला औपचारिक रूप से बंद हो गया। हालांकि, अन्य महिला पहलवानों की शिकायतों पर मुकदमा जारी रहा। अदालत ने सभी गवाहों और पहलवानों के बयान दर्ज किए।
अब चार महिला पहलवानों ने 3 अगस्त के बरी किए जाने के फैसले को सत्र अदालत में चुनौती दी है। अपील में बृजभूषण शरण सिंह के साथ सह-आरोपी विनोद तोमर को बरी किए जाने को भी चुनौती दी गई है।
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