मुजफ्फरनगर में जज रवि कुमार दिवाकर ने सुरक्षा पर जताई चिंता, DGP समेत अफसरों को लिखा पत्र

HIGHLIGHTS
- 4 जुलाई को सुरक्षा में तैनात गनर को हटाए जाने का मामला सामने आया।
- जज ने पत्र में पहले मिल चुकी धमकियों का भी उल्लेख किया।
- उन्होंने सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा और आवश्यक कार्रवाई की मांग की।
मुजफ्फरनगर में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश रवि कुमार दिवाकर ने अपनी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता जताई है। उन्होंने पुलिस महानिदेशक (DGP), एडीजी जोन और एसएसपी मुजफ्फरनगर को पत्र लिखकर प्रतिसार निरीक्षक (आरआई) उदल सिंह पर सुरक्षा व्यवस्था में लापरवाही का आरोप लगाया है। जज दिवाकर ने आशंका जताई है कि सुरक्षा में इस तरह की चूक के गंभीर परिणाम हो सकते हैं।
जज दिवाकर ने पत्र में बताया कि 4 जुलाई को उनकी सुरक्षा में तैनात गनर कांस्टेबल रविंद्र सिंह ठकुरैला को आरआई उदल सिंह ने उनकी सहमति या सूचना के बिना हटा दिया। उनके मुताबिक, गनर में अचानक किया गया यह बदलाव उनकी सुरक्षा व्यवस्था को प्रभावित करने वाला है। गनर रविंद्र सिंह ने भी हटाए जाने के बाद बिना सूचना दिए ड्यूटी छोड़ दी।
सुरक्षा प्रोटोकॉल के उल्लंघन का आरोप
जज दिवाकर ने पत्र में कहा कि सामान्य तौर पर जिलाधिकारी, एसएसपी या पुलिस महानिरीक्षक जैसे अधिकारियों के गनर उनकी सहमति के बिना नहीं बदले जाते। उन्होंने आरोप लगाया कि न्यायिक अधिकारी के मामले में इस प्रोटोकॉल का पालन नहीं किया गया।
शासनादेश और इलाहाबाद हाईकोर्ट के निर्देशों के तहत जज और उनके परिवार को आवासीय गार्ड तथा सुरक्षाकर्मी उपलब्ध कराए गए हैं। जज ने अपनी सुरक्षा में हुई चूक को गंभीर बताते हुए आवश्यक कार्रवाई की मांग की है।
ज्ञानवापी आदेश के बाद मिली थी धमकियां
जज रवि कुमार दिवाकर ने पत्र में पहले मिली धमकियों का भी उल्लेख किया है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2022 में ज्ञानवापी प्रकरण में आदेश के बाद उन्हें धमकी भरे पत्र और कॉल मिले थे।
उन्होंने वर्ष 2025 में दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल द्वारा आईएसआईएस से जुड़े संदिग्धों की गिरफ्तारी और कथित साजिश का भी जिक्र किया। पत्र के अनुसार, आरोपी अदनान खान के खिलाफ यूपी एटीएस में मामला दर्ज हुआ था। इसमें ज्ञानवापी प्रकरण की सुनवाई कर रहे न्यायाधीश को धमकी दिए जाने का तथ्य सामने आने की बात कही गई थी।
इन पूर्व सुरक्षा खतरों के बीच सुरक्षा में किए गए बदलाव को लेकर जज ने कड़ी आपत्ति जताई है।
29 नवंबर 2025 को संभाला था कार्यभार
रवि कुमार दिवाकर ने 29 नवंबर 2025 को मुजफ्फरनगर की फास्ट ट्रैक कोर्ट संख्या-3 में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश के रूप में कार्यभार संभाला था। इससे पहले वह चित्रकूट में तैनात थे। हाईकोर्ट ने 24 नवंबर 2025 को उनका स्थानांतरण आदेश जारी किया था।
मुजफ्फरनगर आने से पहले उन्होंने अपनी सुरक्षा को लेकर मेरठ जोन के एडीजी और एसएसपी को पत्र लिखा था।
साढ़े आठ महीने में 22 दोषियों को सुनाई फांसी की सजा
जज दिवाकर का नवंबर 2025 से अगस्त 2026 तक करीब साढ़े आठ महीने का मुजफ्फरनगर कार्यकाल सख्त फैसलों को लेकर चर्चा में रहा। अप्रैल से अगस्त 2026 के बीच उन्होंने गंभीर आपराधिक मामलों में कुल 22 दोषियों को फांसी की सजा सुनाई। इनमें हत्या, लूट के दौरान हत्या और अन्य जघन्य अपराधों से जुड़े मामले शामिल हैं।
कुछ प्रमुख मामले—
6 अप्रैल 2026: अधिवक्ता समीर सैफी हत्याकांड में तीन दोषियों सिंगोल अल्वी, सोनू उर्फ रिजवान और शालू उर्फ अरबाज को मृत्युदंड।
28 अप्रैल 2026: एक हत्याकांड में महिला और उसके तीन बेटों समेत चार दोषियों को फांसी की सजा।
30 मई 2026: राजेश देवी-हिमांशु हत्याकांड में एक दोषी को मृत्युदंड।
20 जून 2026: राजेंद्र सैनी हत्याकांड में दो दोषियों को फांसी की सजा।
2 जुलाई 2026: ड्यूटी के दौरान होमगार्ड रतिराम की हत्या के मामले में एक दोषी को मृत्युदंड।
6 जुलाई 2026: 16 साल पुराने किसान राजबीर सिंह हत्याकांड में पूर्व प्रधान समेत दो दोषियों को फांसी की सजा।
जुलाई-अगस्त 2026: राजमार्ग लूट-हत्या समेत अन्य जघन्य हत्याकांडों में भी कई दोषियों को सजा सुनाई गई।
17 साल की न्यायिक सेवा में 35 दोषियों को मृत्युदंड
रवि कुमार दिवाकर ने करीब 17 वर्ष की न्यायिक सेवा में अब तक कुल 35 दोषियों को मृत्युदंड की सजा सुनाई है। मुजफ्फरनगर से पहले उन्होंने बरेली समेत विभिन्न जिलों में 13 दोषियों को मृत्युदंड सुनाया था।
वर्ष 2009 में सिविल जज के रूप में न्यायिक सेवा में आने वाले रवि कुमार दिवाकर आजमगढ़, सुल्तानपुर, बदायूं, वाराणसी, बरेली और चित्रकूट में तैनात रह चुके हैं।
ज्ञानवापी मामले से राष्ट्रीय स्तर पर आए चर्चा में
वर्ष 2022 में वाराणसी में सिविल जज के पद पर रहते हुए रवि कुमार दिवाकर ने ज्ञानवापी मस्जिद परिसर के वीडियोग्राफिक सर्वे का आदेश दिया था। इस आदेश के बाद वह राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आए थे। इसी दौरान उन्हें धमकी भरे पत्र और कॉल मिलने की बात सामने आई थी।
अब मुजफ्फरनगर में उनकी सुरक्षा में तैनात गनर को बिना उनकी सहमति या सूचना के हटाए जाने पर उन्होंने उच्च पुलिस अधिकारियों को पत्र लिखकर सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा और आवश्यक कार्रवाई की मांग की है।
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