श्रीकृष्ण जन्मभूमि विवाद में सुलह की कोशिश फिर नाकाम, वार्ता से नदारद रहा मुस्लिम पक्ष

HIGHLIGHTS
- 7 अगस्त की पहली वार्ता भी किसी नतीजे पर नहीं पहुंची थी।
- हिंदू पक्ष ने वैकल्पिक जमीन देने का प्रस्ताव वापस लेने की बात कही।
- मामले की अगली सुनवाई 21, 22 और 23 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट में होगी।
श्रीकृष्ण जन्मभूमि और शाही मस्जिद ईदगाह विवाद मामले में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर चल रही सुलह-समझौते की कोशिशें एक बार फिर नाकाम हो गई हैं। मथुरा के सुलह समझौता केंद्र में मंगलवार को होने वाली दूसरी वार्ता मुस्लिम पक्ष की अनुपस्थिति के कारण विफल रही। मुस्लिम पक्ष के उपस्थित नहीं होने पर कोर्ट ने पत्रावली पर सुनवाई स्थगित कर दी है। अब इस महत्वपूर्ण विवाद की सुनवाई सीधे सुप्रीम कोर्ट में 21, 22 और 23 अगस्त को होगी।
उपस्थित नहीं हुआ मुस्लिम पक्ष
श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति न्यास के अध्यक्ष और हिंदू पक्ष के अधिवक्ता महेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि मंगलवार को सुलह केंद्र में दूसरी सुनवाई निर्धारित थी, लेकिन मुस्लिम पक्ष वहां नहीं पहुंचा। इससे पहले 7 अगस्त को भी दोनों पक्षों के बीच वार्ता हुई थी, जो किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सकी थी।
हिंदू पक्ष ने वापस लिया जमीन देने का प्रस्ताव
अधिवक्ता महेंद्र प्रताप सिंह ने अपना रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि पहले मुस्लिम पक्ष के सामने मस्जिद हटाने के बदले दूसरी जगह जमीन देने का प्रस्ताव रखा गया था। हालांकि, अब उन्होंने कोर्ट में साफ कर दिया है कि पूरी जमीन श्रीकृष्ण जन्मभूमि की है। इसलिए मस्जिद के बदले किसी भी तरह की वैकल्पिक भूमि नहीं दी जाएगी।
'दस्तावेज न होने के कारण कतरा रहा मुस्लिम पक्ष'
मामले के एक अन्य हिंदू पक्षकार दिनेश फलाहरी ने मुस्लिम पक्ष की गैरहाजिरी पर सवाल उठाए हैं। फलाहरी का दावा है कि मुस्लिम पक्ष के पास विवादित स्थल से जुड़े कोई ठोस दस्तावेज नहीं हैं। उनका कहना है कि इसी वजह से मुस्लिम पक्ष बार-बार कोर्ट की कार्यवाही और सुलह-समझौते की बातचीत से बच रहा है।
मेवात में मस्जिद बनाने का खर्च उठाने का दिया था प्रस्ताव
दिनेश फलाहरी ने बताया कि उन्होंने मुस्लिम पक्ष को मेवात में जमीन देने और नई मस्जिद के निर्माण का पूरा खर्च उठाने का प्रस्ताव दिया था। अब सुलह की संभावना खत्म होने के बाद सभी की नजरें 21 से 23 अगस्त तक सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई पर हैं।
Comments0
Leave a comment
Join the conversation — your email will not be published.























Reader comments
No comments yet
Be the first to share your perspective on this story.