दिल्ली प्रदर्शन पर UN मानवाधिकार कार्यालय की टिप्पणी से भारत नाराज, रणधीर जायसवाल ने दिया जवाब

HIGHLIGHTS
- दिल्ली में विरोध प्रदर्शन पर OHCHR की टिप्पणी को भारत ने अनुचित और अस्वीकार्य बताया।
- रणधीर जायसवाल ने संगठन के रवैये को चुनिंदा बताते हुए सवाल उठाए।
- भारत ने चेतावनी दी कि ऐसे रुख से बहुपक्षवाद में विश्वास और संगठन की विश्वसनीयता कमजोर हो सकती है।
नई दिल्ली। दिल्ली में विरोध प्रदर्शन को लेकर संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय (OHCHR) की टिप्पणी पर भारत ने सख्त रुख अपनाया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि इस मामले में जताई गई चिंताएं अनुचित और अस्वीकार्य हैं। उन्होंने इसे भारत के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप के समान बताया।
रणधीर जायसवाल ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय का रवैया चुनिंदा नजर आता है। उन्होंने आरोप लगाया कि दुनिया के दूसरे हिस्सों में हो रहे विरोध प्रदर्शनों और कानून लागू करने वाली एजेंसियों की कार्रवाई पर संगठन ने अपने सार्वजनिक बयानों में ऐसी प्रतिक्रिया नहीं दी है।
OHCHR को भारत ने सुनाई खरी-खरी
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा, "अगर वे इसी रास्ते पर चलते रहे, तो इससे बहुपक्षवाद में लोगों का विश्वास कम होगा। साथ ही, इससे एक संगठन के रूप में उनकी विश्वसनीयता भी कमजोर होती है।"
बिम्सटेक देशों के गृह मंत्रियों की बैठक में दिल्ली घोषणा स्वीकार
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बिम्सटेक देशों के गृह मंत्रियों के संवाद को लेकर भी जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि भारत के गृह मंत्री ने बैठक की मेजबानी की, जिसमें बिम्सटेक के सभी सदस्य देशों ने भाग लिया।
जायसवाल के अनुसार, बातचीत और बैठक के बाद दिल्ली घोषणा को भी स्वीकार किया गया। इसके तहत बिम्सटेक देशों ने विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की प्रतिबद्धता जताई। उन्होंने बताया कि सहयोग के प्रमुख क्षेत्रों में आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई, मादक पदार्थों की तस्करी पर रोक लगाने के उपाय और मनी लॉन्ड्रिंग के खिलाफ आपसी सहयोग शामिल हैं।
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