भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर को मिलेगी नई रफ्तार, कैबिनेट ने मंजूर किए 2.19 लाख करोड़ के प्रोजेक्ट

HIGHLIGHTS
- केंद्रीय कैबिनेट ने 2.19 लाख करोड़ रुपये से अधिक की विकास परियोजनाओं को मंजूरी दी है। इसमें वाराणसी कॉरिडोर, रेलवे विस्तार और सेमीकंडक्टर मिशन जैसी अहम योजनाएं शामिल हैं।
- देश के इंफ्रास्ट्रक्चर और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को मजबूती देने के लिए सरकार ने कई बड़े निवेश प्रस्तावों को हरी झंडी दी।
- कैबिनेट के फैसलों से सड़क, रेल, कृषि और तकनीकी क्षेत्र में विकास को नई गति मिलने की उम्मीद है।
नई दिल्ली। देश के इंफ्रास्ट्रक्चर, उद्योग और तकनीकी क्षेत्र को मजबूत करने के लिए केंद्र सरकार ने बड़े निवेश पैकेज को मंजूरी दे दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में कुल 2.19 लाख करोड़ रुपये से अधिक की कई अहम परियोजनाओं और योजनाओं को स्वीकृति दी गई। केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कैबिनेट के फैसलों की जानकारी दी।
सरकार का कहना है कि इन योजनाओं का उद्देश्य देश में कनेक्टिविटी बढ़ाना, मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को गति देना और भारत को वैश्विक उत्पादन केंद्र के रूप में स्थापित करना है।
वाराणसी में दो बड़े एलिवेटेड कॉरिडोर को मंजूरी
कैबिनेट ने उत्तर प्रदेश के वाराणसी में यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए दो महत्वपूर्ण एलिवेटेड कॉरिडोर परियोजनाओं को मंजूरी दी है।
पहली परियोजना के तहत एनएच-19 और वाराणसी रिंग रोड के बीच 6 लेन का ग्रीनफील्ड एलिवेटेड कॉरिडोर बनाया जाएगा। इस प्रोजेक्ट पर करीब 14,447.64 करोड़ रुपये खर्च होंगे।
वहीं, दूसरी परियोजना में वरुणा नदी के किनारे एलिवेटेड कॉरिडोर विकसित किया जाएगा। इसमें 6 लेन और 4 लेन के हिस्से शामिल होंगे, जिसके लिए करीब 10,998 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इन परियोजनाओं से वाराणसी में ट्रैफिक दबाव कम होने और शहर की कनेक्टिविटी बेहतर होने की उम्मीद है।
रेलवे और कृषि क्षेत्र को भी मिला बड़ा फोकस
कैबिनेट ने रेलवे नेटवर्क को मजबूत करने के लिए कई फैसले लिए हैं। ओडिशा की पारादीप-हरिदासपुर रेल लाइन के दोहरीकरण को मंजूरी दी गई है, जिस पर करीब 2,542 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इसके अलावा डांगोआपोसी-राजखरसावां रेल मार्ग पर चौथी लाइन बिछाने की योजना को भी मंजूरी मिली है, जिसकी लागत करीब 1,365 करोड़ रुपये होगी।
कृषि क्षेत्र के लिए सरकार ने राष्ट्रीय निवेश नीति-2026 को मंजूरी दी है। इसका उद्देश्य देश में यूरिया का घरेलू उत्पादन बढ़ाना और किसानों को खाद की बेहतर उपलब्धता सुनिश्चित करना है।
सेमीकंडक्टर और मोबाइल निर्माण को बढ़ावा
कैबिनेट बैठक में तकनीकी क्षेत्र को आत्मनिर्भर बनाने पर भी विशेष जोर दिया गया। सरकार ने ‘सेमीकंडक्टर 2.0 योजना’ को मंजूरी दी है, जिसके लिए 1.27 लाख करोड़ रुपये का बड़ा बजट निर्धारित किया गया है। इस योजना का लक्ष्य भारत को चिप डिजाइन और निर्माण के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर मजबूत बनाना है।
इसके अलावा देश में मोबाइल फोन निर्माण को बढ़ावा देने के लिए मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग योजना (MPMS) के तहत 62,500 करोड़ रुपये के निवेश को मंजूरी दी गई है।
सरकार के अनुसार, इन फैसलों से रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे, औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा और भारत की आर्थिक विकास यात्रा को नई मजबूती मिलेगी।
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