केरलम: सतर्कता ब्यूरो के दो विभागों को RTI से छूट, जांच के बाद मिलेगी जानकारी

HIGHLIGHTS
- सरकार ने बताया कि करीब 1 से 2 प्रतिशत मामलों में ही ऐसी छूट की जरूरत पड़ती है।
- जांच पूरी होने के बाद प्राथमिकी और आरोपपत्र से जुड़ी जानकारी नियमों के अनुसार जनता को उपलब्ध हो सकती है।
- सरकार ने यह फैसला सतर्कता निदेशक की 11 जनवरी, 2025 को भेजी गई सिफारिश के आधार पर लिया।
केरलम सरकार ने स्पष्ट किया है कि सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के दो विभागों को सूचना का अधिकार (RTI) कानून से छूट मिलने के बावजूद भ्रष्टाचार और मानवाधिकार उल्लंघन से जुड़ी जानकारी जांच पूरी होने के बाद उपलब्ध कराई जाएगी। केरलम के गृह मंत्री रमेश चेन्नीथला ने मंगलवार को कहा कि इस छूट का उद्देश्य भ्रष्टाचार से संबंधित जानकारी छिपाना नहीं, बल्कि जांच को प्रभावित किए बिना पारदर्शिता बनाए रखना है। उन्होंने कहा कि सरकार सूचना के अधिकार कानून को कमजोर नहीं करना चाहती।
जांच पूरी होने के बाद उपलब्ध होगी जानकारी
विधानसभा में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के विधायक के.के. वलसाराज के सवाल का जवाब देते हुए चेन्नीथला ने कहा कि जांच के दौरान संवेदनशील दस्तावेज सार्वजनिक करने से आरोपियों को फायदा मिल सकता है। इससे सबूत जुटाने और मामले की तह तक पहुंचने में भी मुश्किलें आ सकती हैं। इसी वजह से जांच पूरी होने तक कुछ जानकारियों को गोपनीय रखना जरूरी है।
सतर्कता ब्यूरो के दो विभागों को मिली छूट
विधायक वलसाराज ने सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के टी-1 और टी-2 विभागों को RTI कानून से छूट दिए जाने पर चिंता जताई। ये विभाग भ्रष्टाचार के आरोपों और प्रभावशाली लोगों से जुड़े मामलों की गोपनीय फाइलें संभालते हैं।
वलसाराज ने सवाल उठाया कि इस फैसले से सरकारी कामकाज में पारदर्शिता प्रभावित हो सकती है। उन्होंने यह भी पूछा कि आम लोगों के सूचना पाने के अधिकार की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जाएगी।
भ्रष्टाचार और मानवाधिकार उल्लंघन से जुड़ी जानकारी देने का प्रावधान
चेन्नीथला ने कहा कि सूचना के अधिकार कानून में ऐसे प्रावधान मौजूद हैं, जिनके तहत छूट प्राप्त संस्थानों को भी भ्रष्टाचार और मानवाधिकार उल्लंघन से संबंधित जानकारी देनी पड़ सकती है। उच्चतम न्यायालय के फैसलों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि जांच पूरी होने के बाद संबंधित जानकारी उपलब्ध कराई जा सकती है।
चुनिंदा मामलों में ही लागू होगी छूट
गृह मंत्री के मुताबिक, यह छूट सभी मामलों में लागू नहीं होगी। करीब एक से दो प्रतिशत मामलों में ही इसकी जरूरत पड़ती है। उन्होंने भ्रष्टाचार की जांच, रिश्वत लेते पकड़े जाने वाले मामलों और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों का उदाहरण दिया।
चेन्नीथला ने कहा कि संवेदनशील जानकारी समय से पहले सार्वजनिक होने पर जांच प्रभावित हो सकती है। इसलिए कुछ मामलों में जानकारी को गोपनीय रखना आवश्यक है।
प्राथमिकी और आरोपपत्र से मिल सकेगी जानकारी
चेन्नीथला ने बताया कि जांच पूरी होने के बाद प्राथमिकी और आरोपपत्र अदालत में दाखिल किए जाते हैं। इसके बाद नियमों के अनुसार इनसे संबंधित जानकारी जनता के लिए उपलब्ध हो सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो से जुड़ी जानकारी उसकी वेबसाइट पर प्रकाशित की गई है।
पिछली सरकार के कार्यकाल की सिफारिश पर लिया गया फैसला
गृह मंत्री ने बताया कि सरकार ने पिछली सरकार के कार्यकाल में सतर्कता निदेशक की ओर से की गई सिफारिश के आधार पर यह कदम उठाया है। 11 जनवरी, 2025 को भेजे गए पत्र में बताया गया था कि संवेदनशील जानकारी सार्वजनिक करने से चल रही जांच पर क्या असर पड़ सकता है।
उन्होंने यह भी कहा कि खुफिया ब्यूरो और केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो जैसी कई केंद्रीय एजेंसियों को भी सूचना के अधिकार कानून से छूट मिली हुई है।
विधायक के.के. वलसाराज ने इस बात पर जोर दिया कि भ्रष्टाचार से जुड़ी जानकारी हासिल करना नागरिकों का अधिकार है। वहीं, चेन्नीथला ने भरोसा दिलाया कि सरकार पारदर्शिता बनाए रखने के साथ जांच की गोपनीयता भी सुरक्षित रखेगी।
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