संयुक्त राष्ट्र में भारत ने उठाया वीटो पावर का मुद्दा, इसके जिम्मेदार इस्तेमाल पर दिया जोर

HIGHLIGHTS
- संयुक्त राष्ट्र की स्थापना के बाद करीब 200 प्रस्तावों पर 331 बार वीटो का इस्तेमाल हुआ है।
- सुरक्षा परिषद के दो स्थायी सदस्यों ने साढ़े तीन दशक से अधिक समय से वीटो का उपयोग नहीं किया है।
- वीटो के अधिकांश इस्तेमाल या इसकी धमकी तीन स्थायी सदस्यों की ओर से आई है।
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पर्वतनेनी हरीश ने महासभा के पूर्ण सत्र में वीटो पावर के इस्तेमाल पर भारत का पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि वीटो का उपयोग बेहद सावधानी और संयम के साथ किया जाना चाहिए, विशेष रूप से उन मामलों में जो अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा से संबंधित हैं।
पी. हरीश ने कहा कि फिलहाल संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के पांच स्थायी सदस्यों के पास वीटो का अधिकार है। भारत का हमेशा से यह मानना रहा है कि यह अधिकार अपने साथ जिम्मेदारी भी लेकर आता है। इसका इस्तेमाल सीमित राजनीतिक हितों को पूरा करने के लिए नहीं किया जाना चाहिए।
331 बार इस्तेमाल हुआ वीटो
भारतीय प्रतिनिधि ने वीटो के इस्तेमाल से जुड़े आंकड़ों का जिक्र करते हुए कहा कि संयुक्त राष्ट्र की स्थापना के बाद से करीब 200 प्रस्तावों पर 331 बार वीटो का इस्तेमाल किया जा चुका है।
उन्होंने बताया कि सुरक्षा परिषद के पांच स्थायी सदस्यों में से दो ने साढ़े तीन दशक से अधिक समय से वीटो का इस्तेमाल नहीं किया है। वहीं, वीटो के ज्यादातर इस्तेमाल या इसके इस्तेमाल की धमकी केवल तीन स्थायी सदस्यों की ओर से दी गई है।
2022 की पहल से जवाबदेही बढ़ाने की थी उम्मीद
हरीश ने कहा कि वर्ष 2022 में शुरू की गई वीटो पहल को बदलाव की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना गया था। इस पहल के तहत वीटो का इस्तेमाल होने पर संयुक्त राष्ट्र महासभा में बहस अनिवार्य की गई, ताकि संबंधित देशों की जवाबदेही सुनिश्चित की जा सके।
हालांकि, उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र महासभा के प्रस्ताव 76/262 को अपनाए जाने के बाद भी वीटो के बड़े पैमाने पर इस्तेमाल का रिकॉर्ड सामने आया है। यह स्थिति इस पहल से जुड़ी उम्मीदों के विपरीत है।
सुरक्षा परिषद में व्यापक सुधार पर दिया जोर
भारतीय प्रतिनिधि ने कहा कि वीटो का मुद्दा सुरक्षा परिषद में सुधार से जुड़े पांच प्रमुख विषयों में शामिल है, जिन पर अंतरसरकारी वार्ता (आईजीएन) के तहत चर्चा की जाती है।
उन्होंने कहा कि भारत संयुक्त राष्ट्र महासभा के प्रस्ताव 76/262 की भावना और बड़े पैमाने पर अत्याचार की घटनाओं से जुड़े प्रयासों का समर्थन करता है। हालांकि, अब तक के अनुभव से पता चलता है कि अलग-अलग मुद्दों पर छोटे-छोटे कदम उठाने से इस समस्या का समाधान नहीं होगा।
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