छात्र विरोध प्रदर्शन पर किरण बेदी का बयान, कहा- सशस्त्र बलों से टकराव व्यवस्था की खामी

HIGHLIGHTS
- किरण बेदी ने छात्र विरोध प्रदर्शनों से निपटने के तरीके पर सवाल उठाते हुए चरणबद्ध कार्रवाई की बात कही।
- उन्होंने कहा कि सिविल पुलिस को पहली जिम्मेदारी निभानी चाहिए और सशस्त्र बलों का इस्तेमाल अंतिम विकल्प होना चाहिए।
- बेदी ने निगरानी के लिए कैमरे और ड्रोन के उपयोग पर भी जोर दिया।
पूर्व आईपीएस अधिकारी किरण बेदी ने छात्र विरोध प्रदर्शनों से निपटने के तरीके को लेकर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि प्रदर्शनों के दौरान सशस्त्र बलों से सीधा टकराव व्यवस्था की खामी को दिखाता है। बेदी ने मौजूदा व्यवस्था को औपनिवेशिक ब्रिटिश दौर की प्रणाली बताया और कहा कि इसका दुरुपयोग किया जा रहा है।
पहली जिम्मेदारी सिविल पुलिस की होनी चाहिए
किरण बेदी ने कहा कि छात्र प्रदर्शनों के दौरान रक्षा की पहली पंक्ति सिविल पुलिस होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सिविल पुलिसकर्मी युवा होते हैं और उनके पास लाठी नहीं होती है।
उन्होंने कहा कि अगर किसी सभा को गैरकानूनी घोषित किया जाता है तो सबसे पहले सिविल पुलिस को ही बातचीत और नियंत्रण की जिम्मेदारी संभालनी चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि सिविल पुलिस का इस्तेमाल क्यों नहीं किया गया।
बेदी ने कहा कि अगर बैरिकेड तोड़े जाते हैं तो दूसरी पंक्ति में महिला पुलिसकर्मियों को होना चाहिए। महिला पुलिसकर्मी भी लाठी नहीं रखती हैं, लेकिन वे हेलमेट और बॉडी आर्मर से लैस होती हैं। उन्होंने कहा कि भीड़ पूरी तरह नियंत्रण से बाहर होने पर ही सशस्त्र बलों को हस्तक्षेप करना चाहिए। स्थिति के अनुसार कार्रवाई करना उनकी जिम्मेदारी है।
प्रदर्शनों से निपटने के लिए चरणबद्ध तरीका जरूरी
किरण बेदी के अनुसार, छात्र विरोध प्रदर्शनों को संभालने के लिए एक तय चरणबद्ध प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए। सबसे पहले सिविल पुलिस को तैनात किया जाना चाहिए। इसके बाद जरूरत पड़ने पर महिला पुलिसकर्मियों को आगे लाया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि सशस्त्र बलों की मदद तभी ली जानी चाहिए जब स्थिति पूरी तरह बेकाबू हो जाए।
निगरानी के लिए कैमरे और ड्रोन के इस्तेमाल पर जोर
बेदी ने कहा कि वाटर कैनन का इस्तेमाल अंतिम विकल्प के रूप में किया जाना चाहिए। उन्होंने निगरानी के लिए कैमरों के इस्तेमाल पर भी जोर दिया।
उन्होंने कहा कि कैमरों से हर व्यक्ति की गतिविधियों का पता लगाया जा सकता है। इसके अलावा ड्रोन के जरिए हवाई निगरानी भी की जानी चाहिए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि किसने क्या किया।
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