'महाप्रभु जगन्नाथ मेरे जीवन के हर मोड़ पर रहे मार्गदर्शक': राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू

HIGHLIGHTS
- राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भगवान जगन्नाथ के प्रति अपनी गहरी आस्था और आध्यात्मिक जुड़ाव साझा किया।
- पहली बार पुरी दर्शन और रथयात्रा के अनुभव को बताया जीवन का अविस्मरणीय अध्याय।
- राष्ट्रपति बनने के बाद नंगे पांव श्रीमंदिर पहुंचकर महाप्रभु के दर्शन करने की स्मृति भी की साझा।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भगवान जगन्नाथ के प्रति अपनी गहरी आस्था और आध्यात्मिक जुड़ाव का उल्लेख करते हुए कहा कि बचपन से ही उनका जीवन महाप्रभु की भक्ति से प्रेरित रहा है। उन्होंने बताया कि भजन, प्रार्थनाओं और धार्मिक संस्कारों के बीच पली-बढ़ीं, जिससे भगवान जगन्नाथ के प्रति उनकी श्रद्धा समय के साथ और मजबूत होती गई।
राष्ट्रपति ने कहा कि बचपन में गांव, परिवार और विद्यालय के वातावरण में अक्सर भगवान जगन्नाथ की महिमा सुनने को मिलती थी। स्कूल की प्रार्थनाओं और धार्मिक आयोजनों के माध्यम से उनके मन में महाप्रभु के प्रति विशेष विश्वास विकसित हुआ। उन्होंने बताया कि शिक्षकों से पुरी स्थित श्रीजगन्नाथ मंदिर, भगवान बलभद्र, देवी सुभद्रा और भगवान जगन्नाथ की दिव्य छवि के बारे में सुनकर उनके मन में उन्हें देखने की तीव्र इच्छा जगी थी।
उन्होंने स्मरण किया कि उच्च शिक्षा के दौरान पहली बार पुरी पहुंचकर भगवान जगन्नाथ के दर्शन करने का अवसर मिला। श्रीमंदिर की भव्यता, चतुर्धा विग्रह और रथयात्रा की अलौकिक परंपरा ने उनके मन पर गहरा प्रभाव छोड़ा। उनके अनुसार, जगन्नाथ संस्कृति केवल धार्मिक आस्था नहीं, बल्कि समाज को जोड़ने वाली एक महान परंपरा है।
राष्ट्रपति ने रथयात्रा को भगवान जगन्नाथ की सबसे विशेष और जनसामान्य से जुड़ी परंपरा बताया। उन्होंने कहा कि वर्ष में एक बार महाप्रभु अपने मंदिर से बाहर निकलकर भक्तों के बीच आते हैं और सभी को दर्शन देते हैं। भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा के रथों की यह यात्रा करोड़ों श्रद्धालुओं के लिए आस्था और उत्साह का केंद्र होती है।
उन्होंने कहा कि जीवन के कठिन और महत्वपूर्ण क्षणों में भी उन्हें भगवान जगन्नाथ की कृपा और मार्गदर्शन का अनुभव होता रहा है। राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार घोषित होने के समय भी उन्होंने सबसे पहले महाप्रभु का स्मरण कर आशीर्वाद मांगा था। शपथ ग्रहण और उसके बाद की जिम्मेदारियों के दौरान भी उन्हें ईश्वर की विशेष कृपा का एहसास होता रहा।
द्रौपदी मुर्मू ने नवंबर 2022 की अपनी पुरी यात्रा का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि राष्ट्रपति बनने के बाद लंबे समय तक पुरी नहीं जा पाने से मन व्याकुल था। जब अवसर मिला तो उन्होंने परंपरागत प्रोटोकॉल से अलग नंगे पांव श्रीमंदिर तक जाने का निर्णय लिया। मंदिर के शिखर पर स्थित नीलचक्र और पतित पावन ध्वज के दर्शन करते हुए वे श्रद्धाभाव के साथ मंदिर पहुंचीं और भगवान जगन्नाथ के दर्शन कर भावुक हो उठीं।
राष्ट्रपति ने कहा कि उनके लिए भगवान जगन्नाथ केवल आराध्य नहीं, बल्कि समानता, करुणा और सेवा के आदर्श हैं। उनकी प्रेरणा से ही उन्होंने समाज के हर वर्ग की सेवा को अपना कर्तव्य माना है। उन्होंने प्रार्थना की कि महाप्रभु का आशीर्वाद देश, समाज और समस्त मानवता पर सदैव बना रहे।
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