डिजिटल अरेस्ट पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, RBI को 4 हफ्ते में साइबर फ्रॉड खातों के लिए SOP बनाने का आदेश

HIGHLIGHTS
- सुप्रीम कोर्ट ने साइबर धोखाधड़ी मामलों में बैंकों और जांच एजेंसियों की जवाबदेही तय करने पर जोर दिया।
- RBI को म्यूल अकाउंट्स और साइबर फ्रॉड से जुड़े खातों के लिए चार सप्ताह में SOP तैयार करने को कहा गया।
- डिजिटल अरेस्ट से जुड़ी शिकायतों में कमी आने के बावजूद कोर्ट ने लगातार निगरानी की जरूरत बताई।
नई दिल्ली। साइबर धोखाधड़ी पर रोक लगाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कई अहम दिशा-निर्देश जारी किए हैं। शीर्ष अदालत ने भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) को निर्देश दिया है कि वह चार सप्ताह के भीतर अवैध खातों से निपटने के लिए एक मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) तैयार करे।
सुप्रीम कोर्ट ने आरबीआई से कहा है कि वह साइबर धोखाधड़ी से जुड़े बैंक खातों, जिसमें ‘म्यूल अकाउंट्स’ भी शामिल हैं, के प्रबंधन और कार्रवाई के लिए एसओपी तैयार कर जारी करे। कोर्ट ने डिजिटल अरेस्ट जैसे साइबर अपराधों के बढ़ते मामलों को रोकने, उनकी जांच और समाधान की प्रक्रिया को मजबूत करने के लिए ये निर्देश दिए हैं।
आरबीआई को एसओपी बनाने का निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने आरबीआई को बैंकों के लिए एसओपी लागू करने, शिकायत निवारण व्यवस्था और पीड़ितों को पैसा वापस दिलाने की प्रणाली तैयार करने का निर्देश दिया है। साथ ही अंतर-विभागीय समिति को साझा जवाबदेही और पीड़ितों के मुआवजे से जुड़े ढांचे की समीक्षा करने को कहा गया है।
ये निर्देश प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहन की पीठ ने डिजिटल अरेस्ट मामले में स्वत: संज्ञान लेकर चल रही सुनवाई के दौरान दिए। कोर्ट ने भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) की ओर से दाखिल स्थिति रिपोर्ट पर विचार करने के बाद ये आदेश जारी किए।
डिजिटल अरेस्ट मामलों में हुई प्रगति
कोर्ट के सामने पेश रिपोर्ट में 10 दिसंबर 2025 और 9 फरवरी 2026 के अंतरिम आदेशों के पालन में विभिन्न मंत्रालयों, नियामकों, जांच एजेंसियों, बैंकों और अन्य संस्थानों की ओर से उठाए गए कदमों की जानकारी दी गई।
सुप्रीम कोर्ट ने माना कि हालिया रिपोर्ट डिजिटल अरेस्ट साइबर धोखाधड़ी से निपटने में हुई प्रगति को दर्शाती है। रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर डिजिटल अरेस्ट से जुड़ी शिकायतों की संख्या वर्ष 2024 में 1,23,672 से घटकर 2025 में 58,249 रह गई। वहीं 30 जून 2026 तक यह संख्या घटकर 16,377 हो गई।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि इस तरह की धोखाधड़ी से होने वाली आर्थिक हानि में भी कमी आई है। हालांकि, पीठ ने कहा कि इस मामले की लगातार निगरानी जरूरी है।
सीबीआई ने की कई मामलों की जांच
सुप्रीम कोर्ट ने बताया कि सीबीआई ने डिजिटल अरेस्ट से जुड़े 10 मामले और कई अन्य संबंधित केस दर्ज किए हैं। जांच के दौरान सीबीआई ने 238 पीड़ितों की पहचान की, 67 प्रथम स्तर के बैंक खातों का पता लगाया और करीब 80 करोड़ रुपये के लेनदेन का खुलासा किया।
इसके अलावा सीबीआई ने 16 राज्यों के 93 स्थानों पर तलाशी अभियान भी चलाया।
कोर्ट ने अंतर-विभागीय समिति के उस सुझाव पर भी गौर किया, जिसमें डिजिटल अरेस्ट मामलों को सीबीआई को सौंपने के लिए तय 10 करोड़ रुपये की सीमा को कम करने पर विचार करने की बात कही गई है। साथ ही एक ही संगठित नेटवर्क से जुड़े मामलों को एक साथ जोड़ने का सुझाव भी दिया गया।
चार सप्ताह में तैयार करनी होगी एसओपी
सुप्रीम कोर्ट ने आरबीआई को निर्देश दिया कि वह मनी लॉन्ड्रिंग, साइबर धोखाधड़ी और अवैध खातों से निपटने के लिए चार सप्ताह के भीतर एसओपी तैयार कर उसे जारी करे। इस एसओपी को सभी हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को भी उपलब्ध कराया जाएगा।
इसके अलावा कोर्ट ने सभी राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और कानून प्रवर्तन एजेंसियों को शिकायत निवारण मॉड्यूल और धन वापसी मॉड्यूल को जल्द लागू करने का निर्देश दिया है।
राज्यों को डिजिटल अरेस्ट घोटालों, उनकी रिपोर्टिंग प्रक्रिया और उपलब्ध समाधान तंत्रों को लेकर लोगों में जागरूकता फैलाने को भी कहा गया है।
साइबर शिकायतों के समाधान के लिए निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने सभी हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरलों को निर्देश दिया कि वे साइबर धोखाधड़ी के मामलों में बैंक खाते फ्रीज करने से जुड़े न्यायालयों और संबंधित अधिकारियों को शिकायत निवारण व्यवस्था की जानकारी दें।
कोर्ट ने कहा कि इससे प्रभावित लोगों को अन्य कानूनी विकल्पों का सहारा लेने से पहले इन व्यवस्थाओं का उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित किया जा सकेगा। इससे उनके कानूनी अधिकार प्रभावित नहीं होंगे।
बैंक खाता फ्रीज मामलों के जल्द निपटारे पर जोर
सुप्रीम कोर्ट ने उन राज्यों को निर्देश दिया है, जिन्होंने अभी तक राज्य साइबर अपराध समन्वय केंद्र अधिसूचित नहीं किए हैं, वे चार सप्ताह के भीतर इसकी प्रक्रिया पूरी करें। साथ ही I4C के परामर्श से ई-जीरो एफआईआर व्यवस्था अपनाने को कहा गया है।
कोर्ट ने अधिकारियों को साइबर वित्तीय धोखाधड़ी के कारण फ्रीज किए गए बैंक खातों से जुड़े मामलों का जल्द निपटारा सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।
अंतर-विभागीय समिति बैंकों और अन्य संस्थानों से तकनीकी उपायों पर चर्चा करेगी, ताकि डिजिटल अरेस्ट घोटालों को रोका जा सके, ठगी गई रकम की वापसी में मदद मिले, जांच प्रक्रिया आसान हो और सभी कानूनी जिम्मेदारियों का पालन सुनिश्चित किया जा सके।
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