मुजफ्फरनगर: कांवड़ यात्रा में दिखी अनोखी आस्था, 14 फीट के त्रिशूल ने खींचा सबका ध्यान

HIGHLIGHTS
- ग्रेटर नोएडा निवासी अमित दो साथियों के साथ हरिद्वार से गंगाजल लेकर त्रिशूल कांवड़ के साथ यात्रा कर रहे हैं।
- मध्य प्रदेश के कारीगरों ने करीब दो महीने में स्टेनलेस स्टील से इस विशेष त्रिशूल को तैयार किया है।
- अमित प्रतिदिन लगभग 15 किलोमीटर पैदल चलकर इस विशाल त्रिशूल को कैलाशपुर सिद्ध बाबा धाम मंदिर तक ले जा रहे हैं।
मुजफ्फरनगर: कांवड़ यात्रा में इस बार श्रद्धा के साथ-साथ नए प्रयोग और भव्यता की झलक भी देखने को मिल रही है। रविवार दोपहर करीब 3 बजे मुजफ्फरनगर पहुंची 14 फीट ऊंची स्टेनलेस स्टील की त्रिशूल वाली कांवड़ लोगों के आकर्षण का केंद्र बन गई। कांवड़ मार्ग से गुजरते समय राहगीर और श्रद्धालु इसकी तस्वीरें खींचते और वीडियो बनाते नजर आए।
ग्रेटर नोएडा के शिवभक्त लेकर जा रहे त्रिशूल
ग्रेटर नोएडा निवासी अमित अपने दो साथियों के साथ हरिद्वार से पवित्र गंगाजल लेकर त्रिशूल कांवड़ के साथ आगे बढ़ रहे हैं। उनका उद्देश्य ग्रेटर नोएडा स्थित कैलाशपुर सिद्ध बाबा धाम मंदिर में इस विशाल त्रिशूल की स्थापना करना है।
दो महीने में तैयार किया गया विशेष त्रिशूल
शिवभक्तों ने बताया कि इस अनोखे त्रिशूल को बनाने में करीब दो महीने का समय लगा। इसे मध्य प्रदेश के कारीगरों ने पूरी तरह स्टेनलेस स्टील से तैयार किया है। इसके निर्माण में लगभग 50 हजार रुपये की लागत आई है। स्टेनलेस स्टील से बना होने के कारण यह त्रिशूल मजबूत होने के साथ देखने में भी आकर्षक है।
प्रतिदिन 15 किलोमीटर कर रहे पैदल यात्रा
अमित ने बताया कि वह रोजाना करीब 15 किलोमीटर पैदल चल रहे हैं। उन्होंने कहा कि त्रिशूल की ऊंचाई और उसका अधिकतर वजन ऊपर की तरफ होने के कारण इसे संतुलित रखना सबसे बड़ी चुनौती है। तेज हवा चलने पर परेशानी और बढ़ जाती है, लेकिन भगवान भोलेनाथ के प्रति उनकी आस्था उन्हें लगातार आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है।
मनोकामना पूरी होने के बाद बताएंगे उद्देश्य
अमित ने बताया कि यह विशेष त्रिशूल एक खास मनोकामना पूरी होने के लिए लाया जा रहा है। हालांकि उन्होंने कहा कि जब तक उनकी मनोकामना पूरी नहीं होती, तब तक वह इसके बारे में सार्वजनिक रूप से जानकारी साझा नहीं करेंगे।
श्रद्धालुओं के लिए बना आकर्षण का केंद्र
कांवड़ यात्रा में शामिल यह विशाल त्रिशूल श्रद्धालुओं के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। अपनी भव्यता के साथ-साथ यह आस्था, समर्पण और संकल्प के प्रतीक के रूप में भी लोगों का ध्यान आकर्षित कर रहा है।
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