महर्षि वाल्मीकि जयंती पर पीएम मोदी ने दी बधाई, साझा किया संस्कृत सुभाषितम

HIGHLIGHTS
- पीएम मोदी ने सोमवार सुबह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर शुभकामना संदेश पोस्ट किया।
- प्रधानमंत्री ने कालिदास के महाकाव्य ‘रघुवंशम्’ के 14वें सर्ग का श्लोक साझा किया।
- सुभाषितम में क्रौञ्ची के विलाप से महर्षि वाल्मीकि के हृदय में उपजी करुणा का वर्णन है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महर्षि वाल्मीकि जयंती के मौके पर देशवासियों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि महर्षि वाल्मीकि के सद्विचार भारतीय संस्कृति और विरासत के अहम आधार रहे हैं। ये विचार हर युग में राष्ट्र को आगे बढ़ने की प्रेरणा देते रहेंगे।
सोमवार सुबह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट करते हुए पीएम मोदी ने लिखा, 'आप सभी को महर्षि वाल्मीकि जयंती की असीम शुभकामनाएं। उनके सद्विचार भारतीय संस्कृति और विरासत के मूल तत्व रहे हैं, जो हर युग में राष्ट्र को पुष्पित-पल्लवित करते रहेंगे। मानवता के लिए उनके अनमोल संदेश देशवासियों के लिए सदैव पथ-प्रदर्शक बने रहेंगे।'
पीएम मोदी ने साझा किया संस्कृत सुभाषितम
प्रधानमंत्री ने एक अन्य पोस्ट में संस्कृत सुभाषितम भी साझा किया। इसमें लिखा है, 'तामभ्यगच्छद्रुदितप्रवादात्कविः कुशेध्माहरणाय यातः। निषादविद्धाण्डजदर्शनोत्थः श्लोकत्वमापद्यत यस्य शोकः॥'
यह श्लोक महाकवि कालिदास द्वारा रचित महाकाव्य 'रघुवंशम्' के चौदहवें सर्ग के श्लोक 70 से लिया गया है।
सुभाषितम में बताया गया है कि कुश और यज्ञ की समिधाएं लेने गए महर्षि वाल्मीकि ने जब क्रौञ्ची का करुण विलाप सुना, तो उनके निर्मल हृदय में उपजी करुणा श्लोक के रूप में सामने आई। यही श्लोक महर्षि वाल्मीकि की करुणा, समभाव, तपस्या और विद्वत्ता के साथ रामायण की रचना का आधार बना।
'मन की बात' में भी महर्षि वाल्मीकि को किया याद
इससे पहले रविवार को 'मन की बात' कार्यक्रम में भी प्रधानमंत्री मोदी ने महर्षि वाल्मीकि का स्मरण किया था। उन्होंने कहा कि हजारों साल बीत जाने के बाद भी महर्षि वाल्मीकि की रामायण आज लोगों को नई सीख देती है। उनके मुताबिक, रामायण जीवन की गहरी सीख देने के साथ निरंतर प्रयास करते रहने, सेवा, करुणा और सामाजिक समरसता का महत्व भी समझाती है।
पीएम मोदी ने कहा कि वाल्मीकि रामायण में भगवान राम का चरित्र इन मूल्यों का सुंदर उदाहरण है। उन्होंने माता शबरी के प्रेम और भक्ति को स्वीकार किया तथा निषादराज की मित्रता को सम्मान दिया। प्रधानमंत्री के अनुसार, सबको साथ लेकर चलने का यह आदर्श आज भी लोगों को दिशा दिखाता है।
उन्होंने कहा कि इस भावना की झलक अयोध्या के भव्य राम मंदिर में भी दिखाई देती है, जहां महर्षि वाल्मीकि, निषादराज और माता शबरी के मंदिर बनाए गए हैं। पीएम मोदी ने यह भी बताया कि अयोध्या के एयरपोर्ट का नाम महर्षि वाल्मीकि के नाम पर रखा गया है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि ये प्रयास उस महान परंपरा को समृद्ध करते हैं, जिसमें सेवा, समरसता और करुणा को सर्वोच्च स्थान दिया गया है।


















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