ब्राजील चुनाव में लूला डा सिल्वा की जीत, बोल्सोनारो ने नतीजे रद्द करने की मांग की

HIGHLIGHTS
- लूला ने कुल 51.8 फीसदी वोट हासिल किए।
- साओ पाउलो और रियो डी जनेरियो में समर्थकों ने जीत का जश्न मनाया।
- लूला ने सरकार के फैसलों में आम लोगों की भागीदारी बढ़ाने की बात कही।
ब्राजील के राष्ट्रपति चुनाव में लुइज इनासियो लूला डा सिल्वा ने अपने प्रतिद्वंद्वी फ्लावियो बोल्सोनारो को हराकर जीत दर्ज की। इस परिणाम के बाद देश की राजनीति में एक बार फिर बड़ा बदलाव देखने को मिला। चुनाव में हार के बाद बोल्सोनारो ने नतीजों को मानने से इनकार करते हुए चुनाव रद्द करने की मांग की। लूला की जीत को लैटिन अमेरिका की राजनीति के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इससे क्षेत्र में वामपंथी विचारधारा वाले नेताओं की स्थिति मजबूत होने की उम्मीद है।
करीब 44 लाख वोटों के अंतर से जीते लूला
ब्राजील के चुनाव अधिकारियों के अनुसार, सभी मतों की गिनती पूरी होने के बाद लुइज इनासियो लूला डा सिल्वा को 51.8 फीसदी वोट मिले। उन्होंने फ्लावियो बोल्सोनारो को लगभग 44 लाख मतों से पीछे छोड़ दिया। चुनाव परिणाम सामने आने के बाद लूला के समर्थकों ने जश्न मनाया। साओ पाउलो में बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर निकल आए, वहीं रियो डी जनेरियो में वाहनों के हॉर्न बजाकर जीत का उत्सव मनाया गया।
लोकतंत्र बचाने के लिए मतदान जरूरी था: लूला
राष्ट्रपति चुनाव में जीत के बाद लुइज इनासियो लूला डा सिल्वा ने कहा कि उनकी पार्टी लोगों को यह समझाने में सफल रही कि ब्राजील में लोकतंत्र की रक्षा के लिए वोट देना बेहद जरूरी है। उन्होंने दावा किया कि उनकी जीत डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से किए गए विदेशी हस्तक्षेप पर भी भारी पड़ी है।
लूला ने स्पष्ट किया कि ब्राजील किसी दूसरे देश का पिछवाड़ा नहीं है और वह अपने फैसले खुद लेने में सक्षम है। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार देश को चलाने के तरीके में बदलाव करेगी। साथ ही, निर्णय लेने की प्रक्रिया में आम नागरिकों की भागीदारी बढ़ाई जाएगी, ताकि जनता की आवाज को अधिक महत्व मिल सके।
चुनाव में हार के बाद भी नतीजे स्वीकार नहीं कर रहे बोल्सोनारो
चुनाव हारने के बाद बोल्सोनारो ने मतदान का समय बढ़ाए जाने के फैसले पर सवाल उठाए। उन्होंने इसे असाधारण कदम बताते हुए चुनाव परिणाम रद्द करने की मांग की। हालांकि, मतदान का समय बढ़ाने की मांग दोनों उम्मीदवारों की ओर से की गई थी।
लूला के समर्थकों ने कुछ शहरों में बसों के जरिए मतदान केंद्रों तक पहुंचने में परेशानी होने की शिकायत की थी। वहीं, बोल्सोनारो के समर्थकों वाले इलाकों में भारी बारिश के कारण दिक्कतें सामने आई थीं।
मतदान का समय बढ़ाने के फैसले से असमंजस
मतदान समाप्त होने से कुछ मिनट पहले ब्राजील के सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस क्रिस्टियानो जैनिन ने मतदान का समय दो घंटे बढ़ाने का आदेश दिया। इस निर्णय के बाद कई मतदान केंद्रों पर भ्रम की स्थिति बन गई। कुछ केंद्रों पर वोटिंग मशीनें बंद हो चुकी थीं, जबकि अन्य जगहों पर चुनावी प्रक्रिया को लेकर असमंजस बना रहा। इसका असर मतगणना पर भी पड़ा और गिनती में देरी हुई।
बोल्सोनारो के सहयोगियों ने इस फैसले पर सवाल उठाए। उन्होंने जस्टिस के पुराने राजनीतिक संबंधों का भी उल्लेख किया।
महंगाई, रोजगार और अपराध रहे चुनाव के प्रमुख मुद्दे
ब्राजील के राष्ट्रपति चुनाव में महंगाई, रोजगार और अपराध जैसे मुद्दे प्रमुख रहे। बोल्सोनारो ने अपराध पर सख्ती करने और रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतें कम करने का वादा किया था। वहीं, लूला ने अपने चुनाव प्रचार में सामाजिक कल्याण योजनाओं और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा पर जोर दिया।
पहले दौर के मतदान में पीछे रहने के बाद लूला ने अपने चुनाव अभियान में बदलाव किया। उन्होंने युवाओं समेत समाज के विभिन्न वर्गों के मतदाताओं को अपने पक्ष में लाने की कोशिश की।
भ्रष्टाचार के आरोपों के बीच लूला की राजनीतिक वापसी
लूला और बोल्सोनारो, दोनों का राजनीतिक सफर विवादों से जुड़ा रहा है। लूला भ्रष्टाचार के आरोपों में जेल जा चुके हैं, लेकिन बाद में उनकी सजा रद्द कर दी गई। सुप्रीम कोर्ट ने न्यायिक प्रक्रिया पर सवाल उठने के बाद उनकी सजा निरस्त कर दी थी।
इसके बाद लूला ने राजनीति में वापसी की और बोल्सोनारो के खिलाफ अपनी चुनौती को मजबूत किया।
लैटिन अमेरिका की राजनीति पर पड़ सकता है असर
लूला की जीत से लैटिन अमेरिका में वामपंथी राजनीति को मजबूती मिलने की उम्मीद है। ब्राजील इस क्षेत्र की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है, इसलिए वहां सत्ता में बदलाव का प्रभाव आर्थिक नीतियों और अमेरिका के साथ संबंधों पर भी पड़ सकता है।
लूला अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों के आलोचक रहे हैं। ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि उनकी सरकार ब्राजील के आर्थिक और कूटनीतिक हितों को प्राथमिकता देते हुए स्वतंत्र विदेश नीति अपनाएगी।
लूला ने मजदूर संगठन के जरिए अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत की थी और बाद में वर्कर्स पार्टी की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वह 2002 और 2006 में भी राष्ट्रपति चुने गए थे। अब उनकी वापसी को उनके लंबे राजनीतिक सफर की बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। दूसरी ओर, चुनाव परिणामों का विरोध कर रहे बोल्सोनारो के रुख से ब्राजील में राजनीतिक तनाव बढ़ने की आशंका भी पैदा हो गई है।
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