सीईटीए लागू होने पर पीएम मोदी बोले- भारत-यूके साझेदारी को मिलेगी नई ताकत

HIGHLIGHTS
- भारत और ब्रिटेन के बीच CETA और सामाजिक सुरक्षा समझौता लागू, जिससे दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को नई मजबूती मिलेगी।
- करीब 99% भारतीय निर्यात को ब्रिटेन में शुल्क-मुक्त पहुंच मिलेगी, जिससे किसानों, MSME और निर्यातकों को बड़ा लाभ होने की उम्मीद है।
- ब्रिटेन में कार्यरत भारतीय पेशेवरों को राहत, पांच साल तक दोहरे सामाजिक सुरक्षा योगदान से छूट मिलेगी, जिससे भारतीय कंपनियों की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी।
नई दिल्ली। भारत और यूनाइटेड किंगडम (यूके) के बीच आर्थिक सहयोग को नई दिशा देने वाला व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौता (CETA) और सामाजिक सुरक्षा समझौता बुधवार से प्रभावी हो गया। दोनों देशों के बीच लागू हुआ यह करार व्यापार, निवेश, सेवाओं और पेशेवर अवसरों के क्षेत्र में बड़े बदलाव लेकर आएगा। सरकार का मानना है कि इससे भारतीय निर्यातकों, किसानों, एमएसएमई और सेवा क्षेत्र को वैश्विक बाजार में नई मजबूती मिलेगी।
इस समझौते के तहत भारत से ब्रिटेन भेजे जाने वाले लगभग 99 प्रतिशत उत्पादों को शुल्क-मुक्त बाजार पहुंच मिलेगी। इससे भारतीय वस्तुओं की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ेगी और ब्रिटिश बाजार में उनकी पहुंच आसान होगी। यह भारत और ब्रिटेन के आर्थिक रिश्तों में अब तक के सबसे महत्वपूर्ण कदमों में से एक माना जा रहा है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस अवसर को दोनों देशों की साझेदारी का नया अध्याय बताते हुए कहा कि यह समझौता व्यापारिक संबंधों को मजबूत करने के साथ-साथ लोगों के लिए नए अवसर भी पैदा करेगा। उन्होंने कहा कि इससे किसानों, उद्यमियों और लघु एवं मध्यम उद्योगों को विशेष लाभ मिलेगा, जबकि तकनीक, निवेश और नवाचार जैसे क्षेत्रों में सहयोग और गहरा होगा।
प्रधानमंत्री के अनुसार, यह करार भारतीय उद्योगों को ब्रिटेन के बाजार में बेहतर पहुंच दिलाने के साथ-साथ पेशेवर सेवाओं और तकनीकी क्षेत्र में सहयोग को भी गति देगा। उन्होंने कहा कि कुशल भारतीय युवाओं और विशेषज्ञों के लिए भी इससे नए अवसर खुलेंगे।
वहीं, केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने समझौते को भारत के लिए परिवर्तनकारी कदम बताया। उन्होंने कहा कि इससे पारंपरिक उद्योगों के साथ-साथ आधुनिक क्षेत्रों को भी बड़ा फायदा मिलेगा। कपड़ा, चमड़ा, रत्न एवं आभूषण, इंजीनियरिंग उत्पाद, समुद्री खाद्य, रसायन और प्रसंस्कृत खाद्य उद्योगों के निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि की संभावना है।
सरकार का कहना है कि यह समझौता विशेष रूप से किसानों, स्टार्टअप्स और एमएसएमई क्षेत्र के लिए नए अवसर पैदा करेगा। साथ ही आईटी, वित्तीय सेवाओं, शिक्षा और अन्य पेशेवर क्षेत्रों में भी भारतीय कंपनियों और विशेषज्ञों की भागीदारी बढ़ेगी।
इस करार के साथ लागू हुआ सामाजिक सुरक्षा समझौता भी भारतीय पेशेवरों के लिए राहत लेकर आया है। इसके तहत ब्रिटेन में अस्थायी तौर पर कार्यरत भारतीय कर्मचारियों और उनके नियोक्ताओं को पांच वर्षों तक दोहरा सामाजिक सुरक्षा योगदान नहीं देना होगा। इससे भारतीय कंपनियों की लागत कम होगी और वैश्विक स्तर पर उनकी प्रतिस्पर्धात्मकता मजबूत होगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि व्यापार और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े इन दोनों समझौतों का एक साथ लागू होना भारत की वैश्विक आर्थिक भूमिका को और मजबूत करेगा। इससे रोजगार, निवेश और निर्यात के नए अवसर पैदा होने के साथ दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को दीर्घकालिक मजबूती मिलने की उम्मीद है।
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