खुशहालिया चिल्लागाह शरीफ में जिक्र-ए-इलाही और तिलावते कुरआन के साथ मनाया गया पर्व

HIGHLIGHTS
- बिहारगढ़ गांव स्थित खुशहालिया चिल्लागाह शरीफ में बुधवार सुबह आयोजन हुआ
- फजिर की नमाज के बाद दरूद सलाम पेश किया गया
- कार्यक्रम में फातिहा ख्वानी और तिलावते कुरआन-ए-पाक हुई
मुजफ्फरनगर। मोरना क्षेत्र के बिहारगढ़ गांव स्थित खुशहालिया चिल्लागाह शरीफ में ईद मिलादुन्नबी का पर्व अकीदत और हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर चिल्लागाह शरीफ से जायरीनों का एक जत्था खास चादर लेकर कलियर शरीफ के लिए रवाना हुआ।
कार्यक्रम के दौरान जिक्र-ए-इलाही, तिलावते कुरआन-ए-पाक और फातिहा ख्वानी की गई। इसके बाद तबर्रुक (प्रसाद) का वितरण किया गया और दुआ कराई गई।
खुशहालिया चिल्लागाह शरीफ पर बुधवार सुबह हर वर्ष की तरह पारंपरिक और मजहबी अकीदत के साथ जश्ने ईद मिलादुन्नबी मनाया गया। फजिर की नमाज के बाद जिक्र-ए-इलाही, कुरआन-ए-पाक की तिलावत और दरूद सलाम पेश किया गया।
दरगाह हजरत ख्वाजा खुशहाल मियां के सज्जादा नशीं हजरत सूफी जव्वाद अहमद खुशहाली ने अपने संबोधन में कहा कि पैगंबर हजरत मुहम्मद का जन्म इंसानियत के निजाम को स्थापित करने के लिए हुआ था। अल्लाह के नबी होने के बावजूद उन्होंने सच्चाई, समानता और न्याय स्थापित करने के लिए बड़े कष्ट उठाए।
उन्होंने महिलाओं को सम्मान, समानता और सामाजिक अधिकार दिलाए। समाज से रूढ़ियों, अज्ञानता और आडंबर को दूर कर प्रेम और दया का संदेश दिया। उन्होंने जीवन को सरल बनाने, सादगी से रहने और भौतिक संसाधनों का सीमित उपयोग करने की शिक्षा दी।
सूफी जव्वाद अहमद खुशहाली ने बताया कि नबी-ए-पाक ने खुदा की सच्ची इबादत के साथ उच्च आचरण और व्यवहार करने का भी हुक्म दिया। अल्लाह के नबी की शिक्षाओं का पूर्ण पालन करने से इंसान मुसीबतों से दूर रहता है।
उन्होंने हजरत ख्वाजा खुशहाल मियां का भी जिक्र किया, जिन्होंने जंगल में आकर अल्लाह की इबादत की और उनकी दुआओं से अनेक अनुयायी लाभान्वित हुए। उन्होंने कहा कि सूफियाना सिलसिले में हजरत ख्वाजा खुशहाल मियां का नाम बेहद सम्मान के साथ लिया जाता रहेगा।
इस अवसर पर जायरीनों का एक जत्था कलियर शरीफ में आयोजित 758वें उर्स में शामिल होने के लिए खास चादर लेकर रवाना हुआ। कार्यक्रम में तबर्रुक वितरित किया गया और सूफी मौ. साजिद ने दुआ कराई।
इस दौरान सूफी मौ. रईस, सूफी दिलनवाज खान, सूफी कमालुद्दीन, सरदार सतवंत सिंह, सरदार भगवंत सिंह और सरदार शेर सिंह सहित कई गणमान्य व्यक्ति मौजूद रहे।
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