लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर टोल वसूली बंद, खराब सड़क निर्माण पर NHAI ने की बड़ी कार्रवाई

HIGHLIGHTS
- एक्सप्रेसवे पर पांच जगह सड़क धंसने के बाद एनएचएआई ने जांच और सुधार प्रक्रिया शुरू की।
- आईआईटी खड़गपुर के विशेषज्ञों की टीम निर्माण में हुई खामियों का पता लगाएगी।
- प्रभावित सड़क हिस्सों को ठीक करने की जिम्मेदारी निर्माण एजेंसी को दी गई है।
लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर अब यात्रियों से टोल शुल्क नहीं लिया जाएगा। सड़क निर्माण में खामियों के चलते मरम्मत कार्य कराया जा रहा है और इसके पूरा होने तक एक्सप्रेसवे को टोल फ्री रखा जाएगा।
इसके साथ ही एनएचएआई ने लापरवाही के मामले में कई बड़े कदम उठाए हैं। एनएचएआई के प्रोजेक्ट डायरेक्टर नकुल प्रकाश वर्मा को पद से हटा दिया गया है, जबकि पूर्व परियोजना निदेशक सौरभ चौरसिया को चार्जशीट दी गई है। वहीं, निर्माण एजेंसी पीएनसी इंफ्राटेक लिमिटेड को अयोग्य घोषित कर दिया गया है और थीम इंजीनियरिंग सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड को डिबारमेंट नोटिस जारी किया गया है।
42 सौ करोड़ रुपये से ज्यादा की लागत से बना एक्सप्रेसवे
दरअसल, 13 जुलाई को लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे का उद्घाटन किया गया था। 63 किलोमीटर लंबे इस एक्सप्रेसवे के निर्माण में नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) ने 42 सौ करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए हैं।
इस एक्सप्रेसवे पर एक तरफ का टोल चार पहिया वाहनों के लिए 275 रुपये तय किया गया था, जो देश में सबसे महंगा बताया जा रहा है। लेकिन उद्घाटन के बाद पिछले 20 दिनों में पांच स्थानों पर सड़क धंसने के मामले सामने आए, जिसके बाद एनएचएआई और सरकार की किरकिरी हो रही थी।
बुधवार को गोमतीनगर स्थित एनएचएआई की लखनऊ यूनिट में आयोजित प्रेसवार्ता में एनएचएआई के क्षेत्रीय अधिकारी गौतम विशाल ने कार्रवाई की जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि लापरवाही के चलते प्रोजेक्ट डायरेक्टर नकुल प्रकाश वर्मा को हटाया गया है। उनकी जगह बरेली के प्रोजेक्ट डायरेक्टर नवरतन को लखनऊ की जिम्मेदारी दी गई है। नकुल प्रकाश वर्मा को मुख्यालय भेज दिया गया है। इसके अलावा पूर्व परियोजना निदेशक सौरभ चौरसिया को चार्जशीट दी गई है। उनके कार्यकाल में ही एक्सप्रेसवे का अधिकतर निर्माण कार्य हुआ था।
तीन अधिकारियों पर पहले ही हो चुकी कार्रवाई
सड़क धंसने के मामलों में इससे पहले निर्माण एजेंसी के प्रोजेक्ट मैनेजर विवेक कुमार गुप्ता, स्वतंत्र अभियंता टीम के लीडर सुरेंद्र कुमार और रेजिडेंट इंजीनियर यतेंद्र कुमार को परियोजना से हटा दिया गया था।
इन अधिकारियों को दो साल के लिए सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (मोर्थ), एनएचएआई और नेशनल हाईवेज एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एनएचआईडीसीएल) की किसी भी परियोजना में भाग लेने से प्रतिबंधित किया गया है।
पीएनसी इंफ्राटेक पर होगी कार्रवाई
एनएचएआई के क्षेत्रीय अधिकारी गौतम विशाल ने बताया कि एक्सप्रेसवे का निर्माण करने वाली एजेंसी पीएनसी इंफ्राटेक लिमिटेड को अयोग्य घोषित कर दिया गया है। अब कंपनी भविष्य में एनएचएआई के टेंडरों में हिस्सा नहीं ले सकेगी।
इसके अलावा कंपनी की गारंटी जब्त करने, तीन साल तक जिम्मेदार कर्मचारियों पर प्रतिबंध लगाने और एजेंसी की रेटिंग डाउनग्रेड करने जैसी कार्रवाई भी की गई है।
एजेंसी को अपने खर्च पर करीब तीन करोड़ रुपये की लागत से सड़क के प्रभावित हिस्सों की मरम्मत कराने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही उसे कारण बताओ नोटिस भी जारी किया गया है। वहीं, थीम इंजीनियरिंग सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड को भी भविष्य की एनएचएआई परियोजनाओं में भाग लेने से रोकने के लिए नोटिस जारी किया गया है।
आईआईटी विशेषज्ञ करेंगे तकनीकी जांच
लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे की सड़क की जांच लेजर प्रोफिलोमीटर के जरिए की जा रही है। इस तकनीक से सड़क की सतह और उसकी खुरदरापन समेत अन्य तकनीकी पहलुओं की जांच की जाती है।
इसके अलावा आईआईटी खड़गपुर के प्रोफेसर केएस रेड्डी के नेतृत्व में पेवमेंट विशेषज्ञों की टीम को विस्तृत तकनीकी जांच के लिए नियुक्त किया गया है। यह टीम सड़क धंसने के मूल कारणों का पता लगाएगी और सुधार के उपाय सुझाएगी। टीम एक सप्ताह के भीतर अपनी रिपोर्ट देगी।
टोल राजस्व का नुकसान निर्माण एजेंसी से वसूला जाएगा
एनएचएआई के क्षेत्रीय अधिकारी ने बताया कि एक्सप्रेसवे पर मरम्मत का काम जारी है। काम पूरा होने तक टोल वसूली पूरी तरह बंद रहेगी और यात्री बिना शुल्क दिए एक्सप्रेसवे का इस्तेमाल कर सकेंगे।
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