मुजफ्फरनगर में अनोखी कांवड़ बनी आकर्षण का केंद्र, 90 वर्षीय दादा को कंधों पर लेकर चल रहे चार पोते

मुजफ्फरनगर में सावन की कांवड़ यात्रा के दौरान इस बार एक अनोखी कांवड़ श्रद्धालुओं के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है। गाजियाबाद के चार शिवभक्त अपने 90 वर्षीय दादा को कंधों पर बैठाकर हरिद्वार से पवित्र गंगाजल लेकर पैदल यात्रा कर रहे हैं।
गुरुवार दोपहर करीब एक बजे जब यह कांवड़ मुजफ्फरनगर की कच्ची सड़क पर पहुंची तो इसे देखने के लिए लोगों की भीड़ जुट गई। विशेष रूप से तैयार की गई झूला कांवड़ में एक तरफ 51 लीटर गंगाजल रखा गया है, जबकि दूसरी तरफ उनके 90 वर्षीय दादा बैठे हैं।
बताया जा रहा है कि कांवड़, गंगाजल और दादा का कुल वजन करीब 150 किलोग्राम है। चारों पोते बारी-बारी से इस कांवड़ को अपने कंधों पर उठाकर यात्रा पूरी कर रहे हैं।
भगवान शिव से लिया था संकल्प
शिवभक्त मनजीत ने बताया कि उन्होंने भगवान भोलेनाथ से संकल्प लिया था कि वह अपने दादा को कंधों पर बैठाकर हरिद्वार ले जाएंगे, उन्हें गंगा स्नान कराएंगे और फिर भगवान शिव के जलाभिषेक के लिए गंगाजल लेकर पैदल यात्रा करेंगे।
उन्होंने कहा कि यह यात्रा केवल आस्था का प्रतीक नहीं है, बल्कि बुजुर्गों के प्रति सम्मान और सेवा का संदेश भी देती है।
बारी-बारी से उठा रहे 150 किलो की कांवड़
मनजीत ने बताया कि इतनी भारी कांवड़ लेकर चलना आसान नहीं है। इसी वजह से चारों भाई बारी-बारी से कांवड़ उठाते हैं और जरूरत पड़ने पर आराम भी करते हैं।
रास्ते में श्रद्धालु उनका हौसला बढ़ा रहे हैं और भोलेनाथ के जयकारों के साथ उनका स्वागत कर रहे हैं।
बुजुर्गों के सम्मान का दिया संदेश
मनजीत ने कहा कि आज के समय में लोग अपने बुजुर्गों के लिए समय निकालने में भी परेशानी महसूस करते हैं। उनका उद्देश्य समाज को यह संदेश देना है कि माता-पिता और दादा-दादी की सेवा सबसे बड़ा धर्म है।
उन्होंने कहा कि अगर हर व्यक्ति अपने परिवार के बुजुर्गों का सम्मान करेगा तो समाज में संस्कार और अपनापन मजबूत होगा।
लोगों ने बताया आधुनिक श्रवण कुमार
मुजफ्फरनगर पहुंची इस अनोखी कांवड़ को देखकर श्रद्धालुओं ने चारों युवकों की जमकर सराहना की। कई लोगों ने उनके फोटो और वीडियो भी बनाए।
श्रद्धालुओं ने चारों युवकों की इस पहल को आधुनिक समय में श्रवण कुमार की सेवा भावना का उदाहरण बताते हुए प्रेरणादायक बताया।
Comments0
Leave a comment
Join the conversation — your email will not be published.

Reader comments
No comments yet
Be the first to share your perspective on this story.