गेहूं के दामों में एक हफ्ते में 100 रुपये की तेजी, आटा-मैदा भी हुआ महंगा

HIGHLIGHTS
- लखनऊ मंडी में गेहूं का भाव 2700 से बढ़कर 2800 रुपये प्रति क्विंटल हुआ।
- फुटकर बाजार में गेहूं 3000 रुपये प्रति क्विंटल तक बिक रहा है।
- थोक बाजार में आटा 3100-3200 रुपये और मैदा 3200-3400 रुपये क्विंटल है।
महीनेभर में चीनी की कीमतों में हुई अप्रत्याशित बढ़ोतरी के बाद अब गेहूं के दाम भी तेजी से बढ़े हैं। एक सप्ताह के भीतर गेहूं की कीमत में 100 रुपये प्रति क्विंटल तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। कारोबारियों के मुताबिक गेहूं का कम उत्पादन, निर्यात पर रोक और ओएमएसएस (ओपन मार्केट सेल स्कीम) शुरू नहीं होना कीमतों में तेजी की प्रमुख वजहें हैं।
लखनऊ मंडी में एक सप्ताह पहले गेहूं 2700 रुपये प्रति क्विंटल के भाव पर बिक रहा था, जो अब बढ़कर 2800 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गया है। फुटकर बाजार में इसकी कीमत 3000 रुपये प्रति क्विंटल तक है। इसके असर से थोक बाजार में आटा 3100-3200 रुपये प्रति क्विंटल और मैदा 3200-3400 रुपये प्रति क्विंटल के बीच बिक रहा है। फुटकर बाजार में आटा 35 रुपये किलो और मैदा 40 रुपये किलो तक पहुंच गया है।
कारोबारियों के अनुसार आटे और मैदे की कीमत में 3-5 रुपये प्रति किलो तक का अंतर आया है। शहर के फ्लोर मिलर और कारोबारी विकास सिंघल के मुताबिक, अगली फसल आने तक बाजार में गेहूं की कमी न हो, इसके लिए सरकार ने निर्यात पर रोक लगाई है। घरों में आटे और होटल-रेस्टोरेंट में मैदे की अधिक खपत होती है। निर्यात पर रोक के बाद जिन लोगों के पास गेहूं का स्टॉक मौजूद है, उन्होंने कीमतें बढ़ा दी हैं।
हालांकि सोमवार को गेहूं के बाजार में 10-20 रुपये प्रति क्विंटल की गिरावट आई है, लेकिन त्योहारों का दौर शुरू होने के बाद कीमतों में फिर तेजी आने की संभावना जताई जा रही है। कारोबारियों ने बताया कि फिलहाल वे खुले बाजार से ही गेहूं खरीद रहे हैं।
ओएमएसएस (ओपन मार्केट सेल स्कीम) के तहत भारतीय खाद्य निगम अपने सुरक्षित भंडार से अतिरिक्त गेहूं को आटा मिलों, व्यापारियों और थोक उपभोक्ताओं को ई-नीलामी के माध्यम से बेचता है। इसका उद्देश्य कम आपूर्ति वाले महीनों में बाजार में गेहूं की उपलब्धता और कीमतों को नियंत्रित करना है। इसके लिए सरकार न्यूनतम मूल्य निर्धारित करती है। फिलहाल ओएमएसएस के तहत गेहूं की बिक्री शुरू नहीं की गई है।
20-30 प्रतिशत तक घटा गेहूं का उत्पादन
कृषि विशेषज्ञ डॉ. सत्येंद्र सिंह के अनुसार इस बार गेहूं के उत्पादन में 20-30 प्रतिशत तक की कमी आई है। उत्तर प्रदेश, बिहार, हरियाणा और पंजाब में उत्पादन 20-30 प्रतिशत तक घटा है। देशभर में औसतन उत्पादन करीब 20 प्रतिशत प्रभावित हुआ है।
उन्होंने बताया कि जब बुवाई के समय बाजार में गेहूं के दाम अधिक रहते हैं, तो किसान इसकी बुवाई में अतिरिक्त रुचि दिखाता है।
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