कैराना से समाजवादी पार्टी की सांसद इकरा हसन के खिलाफ दर्ज मामले को लेकर राजनीतिक तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। सांसद ने इस एफआईआर को पूरी तरह निराधार बताते हुए कहा है कि वह किसी भी दबाव में आने वाली नहीं हैं और जनता की आवाज उठाने का उनका काम जारी रहेगा।

सांसद ने लगाए गंभीर आरोप

इकरा हसन ने फोन पर बातचीत में कहा कि यह कार्रवाई राजनीतिक दबाव में की गई है और पुलिस प्रशासन विपक्ष की आवाज को दबाने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि इस पूरे मामले को लोकसभा में उठाया जाएगा, साथ ही लखनऊ में वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से शिकायत की जाएगी।

उन्होंने बताया कि पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भी मामले की जानकारी ली है और एफआईआर की प्रति मांगी है। सांसद ने साफ कहा कि यदि प्रशासन यह सोचता है कि मुकदमे दर्ज कर उन्हें रोका जा सकता है, तो यह उनकी गलतफहमी है।

क्या है पूरा मामला

यह मामला 19 मई का बताया जा रहा है, जब इकरा हसन शामली के जसाला गांव में मोनू कश्यप हत्याकांड से जुड़े मामले में मृतक की मां के साथ डीआईजी से मिलने पहुंची थीं। लौटते समय उन पर आरोप लगा कि उनके समर्थकों के कारण यातायात व्यवस्था बाधित हुई।

इसके बाद पुलिस ने सांसद समेत सात नामजद और 20 से 25 अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है।

किन धाराओं में केस दर्ज

एफआईआर में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की कई धाराएं लगाई गई हैं, जिनमें सार्वजनिक व्यवस्था प्रभावित करने, सरकारी कार्य में बाधा डालने और दंगे से संबंधित प्रावधान शामिल हैं। इनमें कुछ धाराओं के तहत एक महीने से लेकर तीन साल तक की सजा और जुर्माने का प्रावधान है।

सपा नेताओं की प्रतिक्रिया

समाजवादी पार्टी के नेताओं ने इस कार्रवाई की कड़ी आलोचना की है। वरिष्ठ नेता फरहाद आलम गाडा ने कहा कि सांसद का उद्देश्य केवल पीड़ित परिवार को न्याय दिलाना था, लेकिन प्रशासन ने उनके साथ सख्ती दिखाई।

वहीं सपा नेता टिंकू अरोड़ा ने इसे विपक्ष की आवाज दबाने की कोशिश बताया। उन्होंने कहा कि सरकार के खिलाफ आवाज उठाने वालों पर लगातार मुकदमे दर्ज किए जा रहे हैं, जो लोकतांत्रिक व्यवस्था के खिलाफ है।