अररिया। बिहार के अररिया जिले में वर्ष 1998 में हुए बहुचर्चित हत्या मामले में करीब 28 साल बाद अदालत ने अहम फैसला सुनाया है। प्रधान जिला एवं सत्र न्यायालय ने 15 आरोपियों को दोषी करार देते हुए उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही प्रत्येक दोषी पर 20 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। जुर्माना न देने की स्थिति में उन्हें छह महीने की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी।

डेंगा चौक पर हुई थी वारदात

यह मामला पलासी थाना क्षेत्र के कुमिहया रामनगर टोला से जुड़ा है। 3 मई 1998 को डेंगा चौक स्थित एक दुकान पर हुए विवाद के दौरान हिंसा भड़क गई थी। बताया जाता है कि बीच-बचाव करने पहुंचे अलीमुद्दीन पर भीड़ ने हमला कर दिया, जिसमें दबिया, फरसा और लाठी-डंडों का इस्तेमाल किया गया। इस हमले में उनकी मौके पर ही मौत हो गई थी।

21 में से 15 आरोपी दोषी करार

पुलिस ने इस मामले में कुल 21 लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। लंबी सुनवाई के दौरान 6 आरोपियों की मृत्यु हो चुकी थी, जबकि शेष 15 को अदालत ने दोषी ठहराया है।

दोषी पाए गए आरोपियों में मो. हाजी रोजिद, समदानी, फकीर मोहम्मद, रजाबुल, अकलिम, नसीम, ऐनुल, सैजुदिन, इसहाक, मो. तैयब, अजमल, हसीब, कुद्दूस, कफील और मो. वसीक शामिल हैं। सभी की उम्र 70 वर्ष से अधिक बताई जा रही है।

13 गवाहों के आधार पर सुनाया गया फैसला

मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से 13 गवाह पेश किए गए थे। गवाहों और साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने इसे पूर्व नियोजित हमला मानते हुए आरोपियों को दोषी करार दिया।

करीब तीन दशक पुराने इस मामले में आए फैसले को न्याय व्यवस्था की लंबी प्रक्रिया के बावजूद न्याय की पुष्टि के रूप में देखा जा रहा है।