बिहार। प्रख्यात जनकवि बाबा नागार्जुन के परिवार से दुखद समाचार सामने आया है। उनकी बड़ी बहू एवं साहित्यकार स्व. शोभाकांत मिश्र की पत्नी रेखा मिश्र का शुक्रवार देर रात निधन हो गया। वह 71 वर्ष की थीं और लंबे समय से अस्वस्थ चल रही थीं।
निजी अस्पताल में इलाज के दौरान निधन
परिजनों के अनुसार रेखा मिश्र काफी समय से बीमार थीं और उनका इलाज शहर के एक निजी अस्पताल में चल रहा था। शुक्रवार देर रात उपचार के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर से परिवार के साथ-साथ साहित्य जगत में भी शोक की लहर फैल गई।
भरा-पूरा परिवार छोड़ गईं रेखा मिश्र
रेखा मिश्र अपने पीछे पुत्र, पुत्री, नाती-पोते सहित परिवार को छोड़कर गई हैं। उनके निधन को परिवार के लिए बड़ी क्षति माना जा रहा है।
एकमी घाट पर हुआ अंतिम संस्कार
शनिवार को दरभंगा स्थित एकमी घाट पर उनका अंतिम संस्कार किया गया। बड़े पुत्र डॉ. कुणाल मिश्रा ने उन्हें मुखाग्नि दी। इस दौरान परिवार के सदस्य, रिश्तेदार और साहित्य एवं सामाजिक क्षेत्र से जुड़े कई लोग मौजूद रहे।
सामाजिक और साहित्यिक जगत में शोक
रेखा मिश्र के निधन पर विभिन्न सामाजिक, राजनीतिक और साहित्यिक हस्तियों ने गहरा दुख व्यक्त किया है। लोगों ने उनके सरल स्वभाव और पारिवारिक समर्पण को याद करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की।
जनकवि बाबा नागार्जुन की साहित्यिक विरासत
बाबा नागार्जुन हिंदी और मैथिली साहित्य के ऐसे प्रमुख कवि रहे हैं, जिन्होंने आमजन, किसान, मजदूर और वंचित वर्ग की पीड़ा को अपनी रचनाओं में आवाज दी। उनका मूल नाम वैद्यनाथ मिश्र था और वे हिंदी साहित्य में ‘नागार्जुन’ तथा मैथिली साहित्य में ‘यात्री’ के नाम से प्रसिद्ध हुए।
उनका जन्म 30 जून 1911 को बिहार के दरभंगा जिले के तरौनी गांव में हुआ था। सामाजिक सरोकार, राजनीतिक चेतना और जनजीवन के यथार्थ चित्रण के कारण उन्हें ‘जनकवि’ के रूप में जाना जाता है।
मैथिली काव्य संग्रह ‘पत्रहीन नग्न गाछ’ के लिए उन्हें वर्ष 1968 में साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। उन्होंने कविता के साथ-साथ उपन्यास, निबंध और अन्य विधाओं में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया।
प्रमुख रचनाएं
काव्य संग्रह: युगधारा, सतरंगे पंखों वाली, प्यासी पथराई आँखें, तालाब की मछलियाँ, खिचड़ी विप्लव देखा हमने
उपन्यास: बलचनमा, रतिनाथ की चाची, बाबा बटेसरनाथ, नई पौध, वरुण के बेटे