अमृतसर। पंजाब की सियासत और धार्मिक मामलों से जुड़े विवादों के बीच मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने शुक्रवार को श्री अकाल तख्त साहिब के समक्ष पेशी के दौरान एक कथित आपत्तिजनक वीडियो को लेकर सफाई दी। उन्होंने कहा कि यह वीडियो पूरी तरह फर्जी है और तकनीक के इस दौर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जरिए किसी की भी वीडियो तैयार की जा सकती है।

मुख्यमंत्री मान ने कहा कि वे स्वयं भी इस मामले की फोरेंसिक जांच के पक्ष में हैं और इसके लिए किसी भी मान्यता प्राप्त लैब में जांच करवाई जा सकती है। उन्होंने यह भी दावा किया कि कई मामलों में ऐसी वीडियो की वास्तविकता बिना विशेषज्ञ जांच के भी समझी जा सकती है।

इस दौरान जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज्ज ने मुख्यमंत्री से स्पष्ट रूप से कहा कि सरकार की किन दो फोरेंसिक प्रयोगशालाओं में इस वीडियो की जांच करवाई जा सकती है, उनके नाम बताए जाएं। इस पर मुख्यमंत्री ने जांच के लिए सहमति जताई।

जत्थेदार गड़गज्ज ने कहा कि यह मामला धार्मिक भावनाओं और गुरु परंपरा से जुड़ा है, इसलिए किसी भी स्थिति में चरित्र हनन जैसी स्थिति नहीं बननी चाहिए। उन्होंने कहा कि वीडियो की सच्चाई या फर्जीवाड़े का फैसला केवल वैज्ञानिक फोरेंसिक जांच के आधार पर ही किया जा सकता है।

मुख्यमंत्री मान ने कहा कि श्री अकाल तख्त साहिब के निर्देशों के अनुसार किसी भी दो फोरेंसिक लैब से जांच करवाई जा सकती है और सरकार इसके लिए तैयार है। वहीं जत्थेदार ने यह भी स्पष्ट किया कि अकाल तख्त साहिब भी अपनी ओर से दो अलग-अलग लैबों से जांच करवाएगा।

बैठक के दौरान यह भी चर्चा हुई कि यदि वीडियो फर्जी साबित होता है तो यह स्पष्ट हो जाएगा, लेकिन यदि जांच में वीडियो वास्तविक पाया जाता है तो आगे का निर्णय खालसा पंथ की परंपरा के अनुसार लिया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि पहले भी इस तरह के कई वीडियो को लेकर विवाद सामने आ चुके हैं और तकनीक के दुरुपयोग की संभावना को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने दोहराया कि यदि जत्थेदार साहिब जांच के लिए कहेंगे तो सरकार पूरी तरह सहयोग करेगी।