राष्ट्रीय जनता दल (राजद) सुप्रीमो और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू यादव ने 22 जनवरी को अयोध्या में राम मंदिर के प्रतिष्ठा समारोह में शामिल होने के निमंत्रण को अस्वीकार कर दिया। 75 वर्षीय राजनीतिक दिग्गज उत्तर प्रदेश के अयोध्या में राम मंदिर के 'प्राण प्रतिष्ठा' समारोह में शामिल होने के निमंत्रण को अस्वीकार करने वाले नवीनतम विपक्षी नेता बन गए। इससे पहले आज, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) प्रमुख शरद पवार ने भी घोषणा की कि वह समारोह में शामिल नहीं होंगे और कहा कि वह बाद में मंदिर जाएंगे।

आरजेडी सुप्रीमो से जब पूछा गया कि क्या वह 22 जनवरी को अयोध्या जाएंगे? इसपर लालू ने जवाब देते हुए कहा कि वह नहीं जाएंगे। इसके साथ ही लालू यादव ने सीट शेयरिंग को लेकर चल रहे विवाद पर भी अपनी चुप्पी तोड़ी है। उन्होंने साफ तौर पर कहा है कि गठबंधन में सीट शेयरिंग इतनी जल्दी नहीं होता है। उन्होंने कहा की सीट शेयरिंग पर काम हो रहा है। पिछले कई दिनों से इस बात की चर्चा जोरों पर है कि आरजेडी और जदयू के बीच अंदर खाने में घमासान छिड़ा हुआ है और उसका बड़ा कारण बिहार में सीटों का बंटवारा है। राजद और नीतीश कुमार की पार्टी जदयू इंडिया गठबंधन का हिस्सा है। अगर नीतीश कुमार इंडिया गठबंधन में रहते हैं तो यह पहला मौका होगा जब लालू और नीतीश एक साथ मिलकर बिहार में लोकसभा चुनाव लड़ेंगे। 

वहीं, कयासों के बीच नीतीश सोमवार को लालू प्रसाद द्वारा आयोजित मकर संक्रांति भोज में शामिल हुए थे। इसी के साथ प्रदेश में सत्तारूढ़ ‘महागठबंधन’ में शामिल दोनों दलों के बीच किसी तरह की खटास की अटकलों को भी खारिज कर दिया। इस अवसर पर पत्रकारों के साथ संक्षिप्त बातचीत में लालू प्रसाद यादव के छोटे बेटे और उनके राजनीतिक उत्तराधिकारी माने जाने वाले राज्य के उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने नीतीश की उपस्थिति पर खुशी जताई। उन्होंने कहा, ‘‘हम माननीय मुख्यमंत्री के घर आने से खुश हैं। हम लंबे समय से लोगों को दही, चिवड़ा, तिल से बनी चीजें और कद्दू की सब्जी का भोज देते आ रहे हैं। मंत्रिमंडल में अन्य सहयोगी भी शामिल हो रहे हैं। हम उन सभी का स्वागत करते हैं।’’