बिहार में सरकारी बंगलों के आवंटन को लेकर राजनीतिक विवाद गहराता जा रहा है। सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जारी बयानबाजी के बीच राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

राजद प्रवक्ता चित्तरंजन गगन ने 10 सर्कुलर रोड स्थित आवास को लेकर भाजपा और जदयू नेताओं की टिप्पणियों पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि क्या सरकारी बंगले किसी राजनीतिक दल की निजी संपत्ति हैं, जिन्हें अपनी मर्जी से आवंटित या खाली कराया जा सकता है।

नियमों में पारदर्शिता की मांग

राजद प्रवक्ता ने कहा कि सत्ताधारी दल के नेता अक्सर नियमों की बात करते हैं, लेकिन नियम सभी पर समान रूप से लागू होने चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि यदि नियमों का उपयोग पक्षपातपूर्ण तरीके से किया जाएगा, तो उसका विरोध किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि सरकारी संपत्तियों को लेकर जिस तरह की बयानबाजी की जा रही है, वह इस बात का संकेत देती है कि कुछ नेता इन्हें अपनी निजी संपत्ति समझने लगे हैं।

आवास आवंटन को लेकर सरकार पर आरोप

राजद ने सरकार पर दोहरे मानदंड अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार और उप मुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी को वही आवास आवंटित किए गए हैं, जिनमें वे पहले से रह रहे थे। इसी आधार पर पार्टी ने सवाल उठाया कि जब कुछ मामलों में पुराने आवास यथावत रखे जा सकते हैं, तो पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के आवास में बदलाव का क्या औचित्य है।

राजद ने इसे प्रशासनिक निर्णय के बजाय राजनीतिक कार्रवाई बताया और कहा कि असली मुद्दा किसी बंगले का नहीं, बल्कि सरकार की नीयत का है।

जनता के पैसे के दुरुपयोग का आरोप

प्रवक्ता ने आगे कहा कि सभी सरकारी बंगले जनता के टैक्स के पैसे से बनाए और संचालित किए जाते हैं, इसलिए इनका उपयोग पारदर्शिता और नियमों के अनुसार होना चाहिए।

उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री और कई मंत्रियों को अतिरिक्त आवास सुविधाएं दी जा रही हैं, जिससे सरकारी संसाधनों का दुरुपयोग हो रहा है। राजद का कहना है कि जनता की कमाई का उपयोग विकास कार्यों की बजाय वीआईपी सुविधाओं पर अधिक किया जा रहा है, जिस पर जनता नजर बनाए हुए है।