बिहार की राजनीति में अहम घटनाक्रम के तहत जनता दल (यू) ने श्रवण कुमार को बिहार विधानसभा में विधायक दल का नेता चुना है। उनके नाम की औपचारिक सूचना विधानसभा को भेज दी गई है और इस संबंध में अधिसूचना भी जारी कर दी गई है।

यह फैसला मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की ओर से लिया गया, जिन्हें हाल ही में जदयू विधायक दल का नेता चुनने के लिए अधिकृत किया गया था। श्रवण कुमार को नीतीश कुमार का भरोसेमंद सहयोगी माना जाता है और वे पहले भी राज्य सरकार में कई अहम मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं।

लंबा राजनीतिक अनुभव

श्रवण कुमार नालंदा विधानसभा क्षेत्र से 1995 से लगातार विधायक चुने जाते रहे हैं। उनकी लंबी राजनीतिक पारी और संगठन में पकड़ को पार्टी के लिए मजबूत आधार माना जा रहा है।

अटकलों पर लगा विराम

20 अप्रैल को जदयू विधायक दल की बैठक में सर्वसम्मति से नीतीश कुमार को नेता चयन का अधिकार दिया गया था। इसके बाद पार्टी के भीतर कई नामों को लेकर चर्चाएं चल रही थीं, लेकिन अंततः नीतीश कुमार ने श्रवण कुमार के नाम पर सहमति जताकर सभी अटकलों को समाप्त कर दिया।

बढ़ी सुरक्षा और जिम्मेदारी

हाल ही में श्रवण कुमार की सुरक्षा भी बढ़ाई गई है और उन्हें Y+ श्रेणी की सुरक्षा प्रदान की गई है। इसे उनके बढ़ते राजनीतिक महत्व के रूप में देखा जा रहा है।

संगठन में संतुलन बनाने की कोशिश

इससे पहले जदयू के वरिष्ठ नेता विजय कुमार चौधरी और बिजेंद्र प्रसाद यादव को उपमुख्यमंत्री बनाया गया था। ऐसे में श्रवण कुमार को विधायक दल का नेता बनाकर पार्टी ने संगठन और सरकार के बीच संतुलन बनाए रखने का संकेत दिया है।