छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में गुरुवार को 12 नक्सलियों ने पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया। इनमें आठ महिलाएं भी शामिल हैं। पुलिस अधीक्षक जितेंद्र कुमार यादव ने बताया कि सभी नक्सली माओवादी संगठन के ‘साउथ सब जोनल ब्यूरो’ से जुड़े थे और बस्तर पुलिस की ‘पूना मर्जेम’ पहल के तहत वरिष्ठ अधिकारियों के सामने मुख्यधारा में लौटे। अधिकारी ने कहा कि राज्य सरकार की आत्मसमर्पण और पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर उन्होंने यह कदम उठाया।
आत्मसमर्पण करने वालों में प्रमुख नाम हैं सोमडू मड़काम (42), जो डिविजनल कमेटी मेंबर और कटेकल्याण एरिया कमेटी प्रभारी थे, हुंगी कुंजाम (19) और पायकी कुंजाम (22)। इन तीनों पर आठ-आठ लाख रुपये का इनाम घोषित था। इसके अलावा अन्य नक्सलियों पर पांच-पांच लाख, एक पर दो लाख और पांच पर एक-एक लाख रुपये का इनाम था। कुल इनामी राशि 46 लाख रुपये बताई गई है।
साथ ही इन नक्सलियों ने एक एके-47 रायफल, दो एसएलआर, 250 जिलेटिन स्टिक, 400 डेटोनेटर, बारूद से भरा प्लास्टिक ड्रम और कॉर्डेक्स वायर पुलिस को सौंपा। अधिकारी ने कहा कि सभी आत्मसमर्पित नक्सलियों को तुरंत 5-50 हजार रुपये की सहायता दी जाएगी और सरकार की नीति के तहत उनका पुनर्वास किया जाएगा।
मुख्यधारा में वापसी का सिलसिला जारी
पुलिस के अनुसार, 1 जनवरी 2024 से अब तक बीजापुर जिले में 888 नक्सलियों ने हिंसा छोड़कर मुख्यधारा में वापसी की है। इसी दौरान 1,163 नक्सली गिरफ्तार हुए और 231 मुठभेड़ों में मारे गए। बस्तर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक सुंदरराज पट्टिलिंगम ने कहा कि माओवादी संगठन तेजी से अपने अंत की ओर बढ़ रहा है। दूरस्थ इलाकों में सुरक्षा कैंप, बेहतर सड़क संपर्क, सफल नक्सल विरोधी अभियान और विकास योजनाओं की प्रभावी पहुंच से उनका आधार लगातार कमजोर हो रहा है।
उन्होंने शेष नक्सली कैडरों से आत्मसमर्पण की अपील करते हुए कहा कि हिंसा केवल विनाश और पीड़ा की ओर ले जाती है, जबकि ‘पूना मर्जेम’ अभियान शांति, सम्मानजनक जीवन और सकारात्मक भविष्य का मार्ग प्रशस्त करता है।
इस वर्ष अब तक 220 से अधिक नक्सलियों ने हथियार छोड़ दिए हैं। बीजापुर जिले में 15 जनवरी को 52 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया था। पिछले वर्ष राज्य में 1,500 से अधिक नक्सली सरेंडर कर चुके हैं। केंद्र सरकार ने इस वर्ष 31 मार्च तक देश से नक्सलवाद समाप्त करने का संकल्प लिया है।