नई दिल्ली। दिल्ली सरकार के शिक्षा निदेशालय ने सोशल मीडिया पर फैल रही खबर को झूठा और दुर्भावनापूर्ण करार देते हुए कहा है कि सरकारी स्कूलों के शिक्षकों को आवारा कुत्तों की गिनती करने का कोई आदेश कभी नहीं दिया गया। इस झूठी जानकारी के प्रसार को गंभीरता से लेते हुए निदेशालय ने दिल्ली पुलिस में शिकायत दर्ज कराई और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
शिक्षा निदेशालय ने स्पष्ट किया कि बीते साल 20 नवंबर को जारी सर्कुलर केवल सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के पालन में था। इसका उद्देश्य स्कूल परिसरों में बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करना था, ताकि आवारा कुत्तों के प्रवेश से होने वाले खतरे को रोका जा सके। सर्कुलर में सुरक्षा कर्मियों की तैनाती और प्रवेश नियंत्रण के उपायों का ही उल्लेख है।
शिक्षा निदेशक ने कहा, “इस सर्कुलर में कहीं भी शिक्षकों को आवारा कुत्तों की गिनती करने का निर्देश नहीं दिया गया। शिक्षकों की पेशेवर गरिमा और शैक्षणिक भूमिका पूरी तरह सुरक्षित है।”
निदेशालय ने बताया कि 30 दिसंबर को इस झूठी खबर पर प्रेस नोट जारी कर स्थिति स्पष्ट कर दी गई थी। इसके बावजूद सोशल मीडिया पर इसे जानबूझकर फैलाया गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए सिविल लाइंस थाने में शिकायत दर्ज कराई गई है और पुलिस को उन सोशल मीडिया हैंडल्स की सूची भी सौंप दी गई है, जो इस फर्जी जानकारी को साझा करने में शामिल रहे।