दिल्ली में मतदाता सूची को अधिक सटीक और त्रुटिरहित बनाने के उद्देश्य से चलाया जा रहा विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान तेजी पकड़ चुका है। इस प्रक्रिया के तहत राजधानी के 42.53 प्रतिशत मतदाताओं, यानी करीब 62.44 लाख लोगों का डेटा मैपिंग कार्य पूरा कर लिया गया है। चुनाव आयोग वर्तमान मतदाता सूची का मिलान वर्ष 2002 की सूची से कर रहा है, ताकि स्थानांतरण, नाम परिवर्तन और संभावित त्रुटियों की पहचान की जा सके।

मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय के अनुसार, यह पूरी प्रक्रिया दो चरणों में की जा रही है। पहले चरण में डिजिटल डेटा मैपिंग के जरिए संदिग्ध, मृत या स्थानांतरित मतदाताओं की पहचान की जा रही है। इसके बाद दूसरे चरण में बूथ लेवल अधिकारी (बीएलओ) घर-घर जाकर भौतिक सत्यापन करेंगे और गणना प्रपत्र भरवाएंगे।

आगामी चरण में 30 जून से 29 जुलाई के बीच बीएलओ हर घर का दौरा करेंगे। यदि किसी घर पर मतदाता नहीं मिलते हैं, तो अधिकारी कम से कम तीन बार पुनः संपर्क करने का प्रयास करेंगे और सूचना पर्ची भी छोड़ेंगे, ताकि संबंधित व्यक्ति आगे संपर्क कर सके।

चुनाव आयोग ने मतदान प्रक्रिया को अधिक सुगम बनाने के लिए पोलिंग स्टेशनों के पुनर्गठन की भी शुरुआत की है। अब प्रत्येक बूथ पर अधिकतम 1200 मतदाता होंगे, जबकि पहले यह संख्या 1500 तक थी। इसके साथ ही आयोग पहली बार सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के जरिए लोगों को जागरूक कर रहा है, जिसमें वीडियो ट्यूटोरियल के माध्यम से नाम खोजने और फॉर्म भरने की प्रक्रिया समझाई जा रही है।

दिल्ली के कुल 1,46,82,523 मतदाताओं में से अब तक 62,44,045 मतदाताओं का डेटा मैप किया जा चुका है। चुनाव आयोग का लक्ष्य 7 अक्टूबर 2026 तक पूरी तरह त्रुटिरहित और अद्यतन मतदाता सूची तैयार करना है।

इसी बीच, सुप्रीम कोर्ट ने भी विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की वैधता पर महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए इसे चुनाव आयोग के अधिकार क्षेत्र में बताया है। अदालत ने कहा कि यह प्रक्रिया स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक है।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने यह स्पष्ट किया कि चुनाव आयोग को मतदाता सूची को दुरुस्त करने का पूरा अधिकार है और इस प्रक्रिया को संवैधानिक दायरे में माना गया है।

चुनाव आयोग का कहना है कि एसआईआर का उद्देश्य फर्जी और अयोग्य मतदाताओं को सूची से हटाकर एक स्वच्छ और विश्वसनीय मतदाता सूची तैयार करना है। आयोग ने यह अभियान पहले बिहार से शुरू किया था, जिसके बाद इसे अन्य राज्यों में भी लागू किया गया है।