गुरुवार, 12 मार्च 2026 को दिल्ली उच्च न्यायालय ने दिल्ली विश्वविद्यालय परिसर में सभी प्रकार के जुलूस, रैलियों और विरोध प्रदर्शनों पर लगे पूर्ण प्रतिबंध पर तुरंत रोक लगाने से इंकार कर दिया। अदालत ने यह स्पष्ट किया कि इस तरह का व्यापक प्रतिबंध लंबे समय तक बनाए रखना सही नहीं होगा। यह मामला एक कानून के छात्र द्वारा दायर याचिका से जुड़ा है।
अधिकारों और अनुशासन के बीच संतुलन जरूरी
मुख्य न्यायाधीश डी.के. उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की पीठ ने सुनवाई के दौरान विश्वविद्यालय और दिल्ली पुलिस से जवाब तलब किया। अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि छात्रों के अभिव्यक्ति और विरोध के अधिकार को बनाए रखने के साथ ही परिसर के अनुशासन और सुरक्षा का भी ध्यान रखना आवश्यक है। पीठ ने आदेश दिया कि वर्तमान प्रतिबंध अगले 10 दिनों तक ही लागू रहेगा, ताकि इस दौरान सभी पक्ष अपनी दलीलें पेश कर सकें।
अदालत की टिप्पणी
सुनवाई के दौरान उच्च न्यायालय ने रेखांकित किया कि “पूर्ण प्रतिबंध जैसी स्थिति स्वीकार्य नहीं है।” अदालत ने कहा कि इस मामले में संतुलित दृष्टिकोण अपनाना जरूरी है, जिससे छात्रों के विरोध प्रदर्शन का अधिकार और विश्वविद्यालय के नियमित संचालन दोनों सुरक्षित रह सकें।
विश्वविद्यालय और पुलिस को नोटिस
अदालत ने दिल्ली विश्वविद्यालय और दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी करते हुए याचिका पर अपना जवाब दाखिल करने के लिए कहा। अदालत इस बात की पुष्टि करना चाहती है कि परिसर में लागू प्रतिबंध कानूनी और संवैधानिक रूप से उचित है या नहीं।