नई दिल्ली। दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कथित आबकारी नीति मामले की सुनवाई कर रही न्यायमूर्ति स्वर्णकांता शर्मा को लेकर एक बार फिर आपत्ति जताई है। उन्होंने दिल्ली हाई कोर्ट में नया हलफनामा दाखिल कर जज से मामले की सुनवाई से स्वयं को अलग करने की मांग दोहराई है।
अपने नए एफिडेविट में केजरीवाल ने न्यायमूर्ति के परिवार से जुड़ा मुद्दा उठाते हुए कुछ नए आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि जज के दोनों बच्चे सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता के साथ काम करते हैं और उन्हें उनके माध्यम से कई मामले मिलते हैं। चूंकि तुषार मेहता इस मामले में सीबीआई की ओर से अदालत में पेश होते हैं, इसलिए केजरीवाल ने सवाल उठाया कि ऐसी स्थिति में जज उनके खिलाफ निष्पक्ष आदेश कैसे दे पाएंगी।
इससे पहले सोमवार को अरविंद केजरीवाल स्वयं दिल्ली हाई कोर्ट में पेश हुए थे और न्यायमूर्ति स्वर्णकांता शर्मा की अदालत में अपनी दलीलें रखी थीं।
फैसला सुरक्षित
सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति स्वर्णकांता शर्मा ने केजरीवाल की रिक्यूजल (स्वयं को अलग करने) संबंधी याचिका पर निर्णय सुरक्षित रख लिया। यह सुनवाई कथित दिल्ली आबकारी नीति घोटाले से जुड़े मामले के संदर्भ में हुई।
करीब चार घंटे तक चली लंबी सुनवाई में दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस हुई। अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि रिक्यूजल से जुड़े न्यायिक अधिकार क्षेत्र पर आज काफी कुछ सीखने को मिला।