सुप्रीम कोर्ट ने आज 2020 के दिल्ली दंगों के मामले में आरोपी उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिकाओं पर सुनवाई की। अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि जेल में लंबे समय तक रहना जमानत देने का आधार नहीं बन सकता। वहीं, मामले के अन्य आरोपियों—गुलफिशा फातिमा, मीरान हैदर, शिफा उर रहमान, मोहम्मद सलीम खान और शादाब अहमद—को जमानत दे दी गई।
ट्रायल में देरी जमानत का आधार नहीं
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि खालिद और शरजील इमाम की स्थिति अन्य आरोपियों से अलग है और ट्रायल में हो रही देरी को जमानत का औचित्य साबित करने के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने यह भी चेताया कि ऐसा करने से वैधानिक सुरक्षा उपाय स्वतः प्रभावित हो सकते हैं।
पुलिस की दलीलें
पुलिस ने अदालत में बताया कि उमर खालिद, शरजील इमाम, गुलफिशा फातिमा, मीरान हैदर और शिफा उर रहमान पर यूएपीए और भारतीय दंड संहिता के तहत गंभीर आरोप हैं। उनके अनुसार, ये आरोपी फरवरी 2020 में हुई हिंसा के मुख्य साजिशकर्ता थे, जिसमें 53 लोगों की मौत हुई और 700 से अधिक लोग घायल हुए। पुलिस ने कहा कि यह हिंसा नागरिकता संशोधन कानून (CAA) और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) के विरोध में चल रहे प्रदर्शनों के दौरान भड़काई गई थी, लेकिन इसका उद्देश्य केवल विरोध तक सीमित नहीं था बल्कि सार्वजनिक अस्थिरता पैदा करना था।
2020 में दिल्ली में हिंसा
दिल्ली के पूर्वोत्तर इलाकों में यह हिंसा उस समय हुई जब नागरिकता संशोधन कानून और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर के विरोध में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन चल रहे थे।