नई दिल्ली। 77वें गणतंत्र दिवस पर कर्तव्य पथ पर दी जाने वाली 21 तोपों की सलामी इस बार भी भारतीय सेना की सटीकता, अनुशासन और स्वदेशी सैन्य क्षमता का प्रतीक बनेगी। सेरेमोनियल बैटरी के मेजर पवन सिंह शेखावत ने इसे यूनिट के लिए गौरव का अवसर बताया।
उन्होंने जानकारी दी कि तोपों को पहले ही कर्तव्य पथ पर तैनात कर दिया गया है और कई चरणों में अभ्यास पूरा किया जा चुका है। वर्ष 2023 के बाद से विदेशी तोपों की जगह पूरी तरह स्वदेशी हथियारों को शामिल किया गया है, जो आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
इस वर्ष के गणतंत्र दिवस समारोह में यूरोपीय काउंसिल के अध्यक्ष एंटोनियो लुईस सैंटोस दा कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगी। उनकी मौजूदगी भारत और यूरोपीय संघ के बीच बढ़ती रणनीतिक साझेदारी को दर्शाती है।
स्वदेशी 105 मिमी लाइट फील्ड गन की ताकत
21 तोपों की सलामी के लिए इस्तेमाल होने वाली 105 मिमी लाइट फील्ड गन पूरी तरह भारत में निर्मित है। यह तोप 17.2 किलोमीटर तक लक्ष्य भेदने में सक्षम है और एक मिनट में 6 राउंड फायर कर सकती है। इसकी खासियत यह भी है कि यह हेली-पोर्टेबल है, यानी जरूरत पड़ने पर हेलिकॉप्टर के जरिए कहीं भी पहुंचाई जा सकती है।
शस्त्र पूजा से शुरू होती है तैयारी
रिहर्सल से पहले जवानों ने परंपरा के अनुसार ‘शस्त्र पूजा’ की। यह अनुष्ठान हथियारों के प्रति सम्मान और सेना की उस संस्कृति को दर्शाता है, जिसमें शस्त्रों को सुरक्षा और शक्ति का प्रतीक माना जाता है।
52 सेकंड में होता है पूरा समन्वय
मेजर शेखावत के अनुसार, 21 तोपों की सलामी बेहद समय-संवेदी प्रक्रिया है। इसे राष्ट्रपति के ध्वजारोहण, अंगरक्षक दल की सलामी और राष्ट्रगान के साथ पूरी तरह तालमेल में 52 सेकंड के भीतर पूरा किया जाता है। इसमें एक भी क्षण की चूक की गुंजाइश नहीं होती।
गौरव, परंपरा और आत्मनिर्भरता की मिसाल
21 तोपों की सलामी केवल सैन्य परंपरा नहीं, बल्कि यह आत्मनिर्भर भारत, स्वदेशी रक्षा निर्माण और भारतीय सेना की उत्कृष्ट तैयारियों का भी प्रतीक है। गणतंत्र दिवस पर यह क्षण देशवासियों के लिए गर्व और राष्ट्रभक्ति की भावना से भर देने वाला होता है।