नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट में आवारा कुत्तों को लेकर चल रही सुनवाई में बुधवार को न्यायालय ने यह स्पष्ट किया कि यह अंदाज़ा नहीं लगाया जा सकता कि कुत्तों के मन में क्या चल रहा है और वे कब किसी पर हमला कर सकते हैं।
इस मामले की सुनवाई पीठ के तीन न्यायाधीश – न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, संदीप मेहता और एनवी अंजारिया – कर रहे हैं। उल्लेखनीय है कि 7 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया था कि स्कूल, अस्पताल, खेल परिसर, बस स्टैंड और रेलवे स्टेशन जैसे सार्वजनिक और संस्थागत स्थानों से आवारा कुत्तों को हटाया जाए। इसके बाद उन्हें उचित नसबंदी और टीकाकरण के बाद आश्रयों में स्थानांतरित किया जाना चाहिए।
न्यायालय ने यह भी कहा कि इन जानवरों के व्यवहार को लेकर किसी भी तरह की लापरवाही नहीं बरती जानी चाहिए और सभी कदम मानवता तथा सुरक्षा के दृष्टिकोण से उठाए जाएँ।